सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 152, कुल 454 में से
संदर्भ में पढ़ें१४४ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड
है 1 यहाँ शुभ ग्र ह हो तो अनिष्ट हीं होता । पाप ग्रह हो तो पूर्ण अनिष्ट होता है पाण
और शुभ ग्रह वहाँ हो तो मिश्रित फल होगा । इस प्रकार लग्न अष्टक वर्ग से सव भाव के फल का विचार होता है । र (र) अष्टमेश जिस राशि में हो उस राशि के त्रिकोण शोधित रेखा को अष्टम स्थान की रेखाओं से गुणाकर १२ का भाग देने से जो शेष वचे उस राशि या उसके
त्रिकोण की राशि में जब गोचर का सूर्य जाता है, तव उस सौर मास में अनिष्ट
होता है जसे अष्टमेश शनि सिंह राशि का है सिंह में लग्न अ० वर्ग में त्रिकोण के
पश्चात् १ रेखा है । अष्टम स्थान में मकर राशि है उसकी ५ रेखा हैं। ५%१-५-: १२=शेष ५ सिंह है । इसके त्रिकोण में धन और मेष है इन सौर मास में ( गोचर का
सूर्य इन राशियों में जाने पर ) अनिष्टकारी होगा ।
(३) शनि के स्थान में आरम्भ करके अष्टमेश जहाँ हों उस स्थान तक की
रेखाओं को जोड़कर अष्टम स्थान की रेखा से गुणाकर १२ का भाग देना जो शेष राशि आवे उसमें या उसके त्रिकोण में जव गोचर का सूयं जाता है उन सौर मासों में
अरिष्ट होता है । जैसे अष्टमेश शनि सिंह राशि में है यहाँ शनि और अष्टमेश एक ही है । केवल सिंह की रेखा ४ थी । अष्टम स्थान की रेखा ५ है। ५१(४-८२० -+ १२=शेष ८ वृश्चिक या इसके त्रिकोण की राशि मीन और कर्के । इन सौर मासों में अरिष्ट होगा ।
प्रत्येक ग्रह के अष्टक वर्ग से शुभाशुभ समय भी प्रकट होता है लग्न से उस ग्रह तक जिसका अष्टक वर्ग है और उस ग्रह से लग्न तक रेखाओं को जोड़ने से जो समय आयगा पाप ग्रह से पाप फल शुभ ग्रह से शुभ का समय प्रकट होगा जैसे :--
(१) सूर्य अष्ट० वर्ग में लग्न मिथुन से सूर्य स्थित राशि मीन तक ३९ रेखा हैं और सूर्य की मीन राशि से मिथुन लग्न तक १७ रेखा हैं । इन वर्षो में रोगादि फल होगा ।
(२) मंगल के अ० वग में छर्न मिथुन से वृश्चिक के मंगल तक २० रेखा हैं और
मंगल से लग्न तक २८ रेखा हैं इन वर्षों में कष्ट शस्त्र अग्निभय आदि होगा ।
(३) शनि से लग्न तक शनि अ० वर्ग में ९ रेखा हैं और शनि से लग्न तक ३७ है इन वर्षो में बड़ा कष्ट रोग पीड़ा आदि होगा । (४) चन्द्र अ० वर्ग में लग्न से चन्द्र तक ३९ रेखा हैं और चन्द्र से लग्न तक १५ रेखा हैं इन वर्षों में सुख होगा, भाग्यवृद्धि होगी । (५) बुध अ० वर्ग में लग्न से बुध तक ४२ रेखा हैं बुध से लग्न तक १७ रेखा हैं इन वर्षो में सुख होगा भाग्य वृद्धि धमं के कार्य होंगे । (६) गुरु अ० में लग्न से गुरु तक ४० रेखा हैं गुरु से लग्न तक २५ रेखा हैं इन वर्षों में स्वास्थ अच्छा रहेगा रोग दूर होगा सुख होगा । (७) शुक्र अ० वर्ग में लग्न से शुक्र तक ४२ रेखा हैं शुक्र से लग्न तक १९ रेखा हैं इन वर्षों में व्यापार आदि का सुख स्त्री सुख आदि प्राप्त होंगे ।