भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

पृष्ठ 151, कुल 454 में से

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अस्टक वर्ग विचार : १४३

=२१ देर्डुन्शेष १४ चित्रा में या इसके त्रिकोण धनिष्ठा और मृग० में जब शनि

जायगा तव शत्रु द्वारा कष्ट होगा । परन्तु मंगल स्वगृही होने से शत्रु पीड़ा बढ़ने नहीं देगा अर्थात्‌ कष्ट न होगा ।

(७) सप्तम में-३ रेखा हँ । इसमें पाप ग्रह केतु है तो स्त्री सम्बन्ध से पीड़ा देगा जवकि शनि उन नक्षत्रों में जायगा जिसका वर्णन चतुर्थ भाव के फल विचार में दिया है।

(८) अष्टम में पाँच रेखा हैं। योगपिंड ५३ १६ ५=४१५-- २७-१५३६-शेष१०

मघा या इसके त्रिकोण के नक्षत्र मूल और अश्विनी में जव शनि जायगा कोई अनिष्ट

नहीं होगा । क्योंकि इसमें शुभग्रह गुरु बेठा है ।

(९) नवम में-३ रेखा हैं चन्द्र और बुध इसमें हैं । इससे चतुर्थ भाव फल विचार

में जिन नक्षत्रों का वर्णन है उनमें शनि जायगा तो भाग्य सम्बन्धी कष्ट नहीं होगा ।

(१०) दशमभाव में ३ रंखा हैं सूये और शुक्र पाप और शुभग्रह मिश्रित होने से

मिश्रित फल होगा । जव चतुर्थ में बताये नक्षत्रों में शनि जायगा तब व्यापार जीविका

आदि सम्बन्ध से मिश्रित फल होगा ।

(११) लग्न में ५ रेखा हैं । कोई ग्रह नहीं है । अष्टम भाव के अनुसार नक्षत्रों में

जव शनि जायगा तो तव आय के सम्वन्ध में विशेष विघ्न वाधा नहीं होगी ।

(१२) व्यय में भी ५ रेखा हैं कोई ग्रह नहीं हैं उपरोक्त नक्षत्रों में शनि जायगा

तो खर्च के सम्वन्ध से विशेष कोई झंझट नहीं होगी । ४

संक्षिप्त में शनि के १२ भावों का फल |

गोचर में शनि नक्षत्र भाव स्थूल फल विचार

पुष्य, अनुराधा, उ० भाद्र० लग्न, द्वितीय, शारीरिक कष्ट, धन सम्बन्धी वातों की

तृतीय किंचित्‌ चिंता, भाइयों के सम्बन्ध के कष्ट।

आर्द्रा, स्वातो, शतभिष चतुर्थ, पंचम सुख भू-संपत्ति मातृ सुख, संतान सम्बन्ध

: सप्तम,नवम, से किंचित्‌ चिंता होगी, स्त्री को कष्ट, भाग्य

दशम में साधारण व्यापार जीविका सम्बन्धी

कुछ चिंता होगी ।

चित्रा, धनिष्टा, मुग षष्ठ शत्रु द्वारा विशेष कष्ट नहीं ।

सघा, मूल, अश्विनी अष्टम,लाभ आयु सम्बंध से कोई अनिष्ट नहीं होगा

व्यय लाभ में विशेष बाधा नहीं होगी । और

विशेष खर्च की झंझट नहीं होगी ।

उपरोक्त भाव की रेखा ><योगपिंड<- १२=शेष राशि या उसके त्रिकोण में शनि

आवे तब उस समय भी उपरोक्त फल का विचार करना ।

अष्टक वर्ग से भावफल विचार दु

(१) जिस भाव का फल विचारना हो उस भाव की राशि गत रेखा % योग

-:-१२ शेष राशि या उसके त्रिकोण की राशि में जब शनि जाता है तव उसका

अनिष्ट फल प्रगट है यदि उसमें कोई ग्रह नहीं है तो लेश. मात्र अनिष्ट होता

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