भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

पृष्ठ 150, कुल 454 में से

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१४२ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड

अप्टम मीन है जिसकी रेखा ३ है योगपिंड ४९ है। ४९५३=१४७-- २७=५२उ शेष

१२ उ. फा. हुआ इसमें या इसके त्रिकोण का उ० षा० या कृतिका में जब शनि जाये

तब मरण संभव है। या ३)१(४९-१४७--१२-१२ह६ 45शेष ३ मिथुन. या इसके

त्रिकोण की राशि तुला और कुंभ में जव शनि गोचर में जायगा तब मृत्यु संभव है ।

इस समय छिद्रा दशा हो अर्थात्‌ जन्म कालीन नीच या शत्रुगृही वली ग्रह की अन्त￾दंशा हो तो मृत्यु अवश्य होगी । .

. (२०) जिस राशि में रेखा न हो उसमें गोचर का शनि जाये और उस समय

दुष्ट दशा भी हो तो मृत्यु हो । छु

-(२१) अन्यमत-शनि के अ० वर्ग में लग्न से जो अष्टम भाव हो उसकी शुभ

. रेखा,शनि योगपिर्ड :- २७=शेष नक्षत्र या उसके त्रिकोण में, जब शनि या गुरु जावे

तब मृत्यु होगी ।

लग्न के अष्टकवर्ग का फल

लग्न अष्टकवर्ग कुण्डली से सब भावों के फल जानने की यह रीति हैः--

जिस भाव का फल विचारना हो उस भाव गत लग्न अ० वर्ग रेखा को लग्न

अ० वर्ग योगपिंड रा गुणा कर २७ का भाग देना । शेष नक्षत्र या उसके त्रिकोण में

जब शनि जावे तव यह फल होता है ।

(१) यदि उस भाव में कोई ग्रह न हो तो भाव फल साधारण क्लेश होता है।

(२) उसमें कोई शुभ ग्रह हो तो उस भाव के फल में अनिष्ट होने की सम्भावना

नहीं होगी । १

(३) उसमें कोई पाप ग्रह हो तो उस भाव के फल में क्लेश लाता है ।

(४) उसमें कोई पाप और शुभ ग्रह हो तो भाव का फल मिश्रित होगा ।

उदाहरण १)-लग्न अप्ट० वर्ग में-लग्न में ४ रेखा हैं लग्न योगपिंड परे है ।

८३५४=३३२--२७=१२६ङ=शेष ८ पुष्य नक्षत्र, इसके त्रिकोण के नक्षत्र अनु-

राधा और उ० भा० लग्न में पाप ग्रह राहु है। इसलिये इन नक्षत्रों में गोचर का

शनि जाने पर कष्ट की सूचना देगा ।

(२) धनभाव-लग्न से दूसरे भाव में ४ रेखा है । इसमें कोई ग्रह नहीं है । उप￾रोक्त नक्षत्रों में शनि जायगा तो धन सम्बन्धी बातों में कुछ चिन्ता होगी ।

(३) प्रातृभाव--इसमें भी ४ रेखा हैं । इसमें शनि है । इससे जब, गोचर में

उपरोक्त नक्षत्रों में शनि जायगा तो भाई आदि को कष्ट होगा ।

` (४) चतुर्थ में-३ रेखा हैं कोई ग्रह नहीं है। ३ रेखा%योगपिंड :३=२४९ --

२७=९६७=शेष ६ आर्द्रा और इसका त्रिकोण नक्षत्र स्वाती, शतभिष पर जब शनि

आयगा तो सुख, माता, भू-सम्पत्ति आदि की कुछ चिन्ता होगी ।

(५) पंचम में-३ रेखा हैं कोई ग्रह नहीं है तो उपरोक्त नक्षत्रों मे शनि जाने

पर पुत्र सम्बन्ध से नाम मात्र को कुछ चिंता. होगी ।

(६) षष्ठ में--७ रेखा हैं इसमें पाप ग्रह मंगळ स्वगृही है ७५८३५८१ -न २७

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