भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

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अष्टक वर्भ विचार : १४१

(२) शनि अ० वर्ग में जिस राशि में कोई रेखा नहीं है उस राशि में गोचर का शनि आमे से मृत्यु या धन हानि होती है । (३) जन्म में शनि केन्द्र में हो । किसी केन्द्र स्थान में तुला राशि हो पर शनि तुला में न हो ऐसे शनि स्थिति राशि की ४ या कम रेखा हो तो अल्पायु हो । (४) लग्न में बली शनि हो उसमें ५-६ रेखा हों तो धन की हानि होती है जन्म से हो दुःख भोगता है ।

(५) शनि लग्न में हो रेखा न हो तो अल्पायु हो ।

(६) चंद्र शुभ वर्ग शोर शनि नीच या शत्रुगृही हो ऐसे शनि स्थिति राशि में

५-६ रेखा हो तो दीर्घायु हो । (७) शनि नीच या शत्रुगृही हो और शुभ दृष्ट हो, शनि पर ४ रेखा से अधिक हो तो दीर्घायु हो ।

(८) शनि लग्न या पंचम स्थान में हो, नीच शत्रुगृही या अस्त हो और शनि पर ४ या ६ रेखा हो तो बहुत दासियाँ होती हँ ! यह धनी और ऊंटों का मालिक होता है।

(९) शनि लग्न या पंचम में हो और शनि पर ७रेखायें हों तो धनी हो । ८ रेखा

हों तो ग्राम शहर आदि का अधिपति हो । ऐसे शनि पर ७-८ रेखा हों तो व्यापार में अप्रवृत्ति होने से लक्षाधीश हो ।

(१०) शनि मंगल युक्त हो, शनि पर ४-५ रेखा हो तो पुर ग्राम आदि का

स्वामी हो ओर तंत्र मंत्र जानने वाला हो ।

(११) शनि ३-६-११ घर में हो नवमेश या दशमेश हो तो राजा सदुश हो।

(१२) शनि चंद्र युक्त लग्न में हो शनि की चार रेखा हो तो ऋणग्रस्त हो ।

(१३) यदि शनि चंद्र युक्त ४, ७ या १० स्थान में हो ४ रेखा हो तो राजयोग होता है । RR

(१४) शनि कहीं हो उस पर ३ य। कम रेखा हो तो परदेश में मृत्यु हो । (१५) चतुर्थेश से युक्त या दुष्ट शनि द्वितीय में हो शनि पर २, ३ रेखा होतो

तीर्थाटन करता है।

(१६) शनि दशम में दशमेश युक्त हो ३ रेखा हो तो जीवन के विशेष अंश में

परदेशवासी रहता है ।

(१७) शनि अ० वं में जिस स्थान में एक भी रेखा न हो उस राशि में जब

` शनि गोचर में जावे उस समय सूर्य और चंद्र भी गोचर में वहाँ आवें तब बहुत

अनिष्ट कारी होता है । इस समय दशा भी खराव हो तो मृत्यु भी संभव है ।

. (१८) शति अ० वर्ग में जिस राशि में रेखा न हो उसमें सूर्य या शनि या दोनों

जब जाते हैं तो रोग पीड़ा आदि का कष्ट होता है ।

(१९) शनि से अष्टम राशि की रेखा%योगपिड-+ २७=शेष नक्षत्र, या उसके

त्रिकोण में जो रेखा%योगपिंड5-१२=शेष राशि, पर उसके त्रिकोण में जब शनि

जायया तब मृत्यु संभव हैं या सुख एवं धन को हानि हो । जैसे सिंह पर शनि है उससे