सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 148, कुल 454 में से
संदर्भ में पढ़ें१४० : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड
४ >९ ४४-१७६ ~ १२=१४४=शेष ८ राशि वृश्चिक में या इसके त्रिकोण मीन और
कर्क में जब शनि जायगा तब स्त्री को कष्ट होगा ।
(२) शुक्र अष्ट० में जिस २ राशि में अधिक रेखा हो उस २ राशि में जब शुक्र
गोचर में जायगा तब धन, स्त्री और भूमि का सुख लाभ होगा ।
(३) शुक्र अ० वर्ग की जिस राशि में कम रेखायें हों उस राशि की दिशा में
जातक स्त्री का शयन गृह बनावे तो स्त्री जातक के वशीभूत रहे। अन्यमत जिस राशि
में अधिक रेखा पड़ती हों उस राशि की दिशा में गृह निर्माण करता है ।
(४) केन्द्र या त्रिकोण गत शुक्र स्थिति राशि की ८ रेखा हों तो सेनापति या
खाहनाधिपति हो ७ रेखा-धनाढ्य रत्नादि सम्पन्न या जन्म भर सुखी रहे । ५-६ रेखा दाम्पत्य जीवन सुखमय हो ।
यदि शुक्र नीच का हो या अस्त या ६-८ या १२ भाव में हो तो कोई राजयोग
होने पर भी राजयोग नष्ट हो जाता है ।
(५) शुक्र मेष या वृश्चिक का हो शुभ ग्रह युत या दृष्ट हो ४ से अधिक रेखा हों "तो धनी बहुत वाहन युक्त होता है
(६) शुक्र केन्द्र या त्रिकोण में हो मंगल से दृष्ट न हो शुक्र स्थिति राशि की ४
से अधिक रेखा हों तो अल्प अवस्था में विवाह हो । मंगल से दुष्ट होने में विवाह में
विघ्न होता है । -
(७) शुक्र १० या ११ राशि में हो मंगल से दृष्ट हो ओर शुक्र स्थिति राशि की
३ या अधिक रेखा हों तो उसकी स्त्री कुलटा होती है ।
शनि अष्टक वर्ग फल
शनि के अष्टक वर्ग से आयु का विचार होता है जिस राशि में शनि हो उससे अष्टम स्थान मृत्यु स्थान कहलाता है ।
(१) शनि अ० वर्ग में लग्न से शनि तक जितनी रेखायें हों उतने वर्ष में जातक
हो रोग या झगड़ा होता है।
शनि से लग्न तक जितनी रेखाएं हों उतने वषं में मृत्यु, धनक्षय या कष्ट या
“विदेश गमन होता है ।
लग्न से शनि तक और शनि से लग्न तक जितनी रेखा हों सबको जोड़ने से जो
संख्या आये उतने वर्ष में मृत्यु का भय हो ।
शनि अष्टक वर्ग में कुल ३९ रेखाएं होती हैं उसमें शनि स्थिति राशि एवं लग्न
ड स्थिति राशि की रेखाओं को जोड़ने से ठीक कष्ट प्रद वषं आयगा ।
इसी प्रकार लग्न से शनि तक अर्थात् शनि स्थिति राशि तक जितनी रेखाएं हों
उनको ७ से गुणाकर २७ का भाग दो जो शेष रहे उस संख्या के नक्षत्र में गोचर में
जब शनि आता है तब सुख एवं धन की हानि होती है ।
जसे शनि अ० वर्ग में लग्न से शनि स्थिति राशि तक ९ रेखा हैं । शनि योग `
पिंड ४९ है ४९ > ९=४४१ =- २७-१६६७ शेष ९ श्लेषा नक्षत्र में जव गोचर का
खचि जायगा तब सुख और धन की हानि .होगी ।