सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 147, कुल 454 में से
संदर्भ में पढ़ेंअष्टक वर्ग विचार : १३९.
(६) त्रिकोण में स्वक्षेत्री गुरु हो उस पर ३ या कम रेखा हों तो संतानों की
मृत्यु हो ।
(७) गुरु जिस राशि पर हो उसका स्वामी उच्च का हो गुरु अ० बग में उच्च ग्रह
पर ५ रेखा हों तो वह राजा या महाराजा होता है ।
(८) लग्न से ६ या ८ घर में गुरु लग्नेश युक्त हो गुरु स्थिति राशि की ३ या
कम रेखा हों तो आजन्म भाग्यहीन रहे ।
(९) ६-८या १२ घर में गुरु हो गुरु से ३ या पांचवें स्थान में गुरु अ० वर्ग
` में जितनी रेखायें हों उतनी संतान होगी ।
(१०) लग्न से पाँचवें घर का स्वामी गुरु से युक्त या दृष्ट हो ओर पंचमेश स्थिति
राशि में ४ या अधिक रेखा हों तो एक संतान, कुल की वृद्धि एवं ख्याति करने
वाला हो ।
(११) लग्न से पञ्चम घर को स्वामी जिस राशि में हो उस राशि का स्वामी यदि गुरु से युक्त या दुष्ट हो । पंचमेश स्थिति राशि पर ३ या कम रेखा हों तो १ संतान जातक के प्रति दुर्व्यवहार करने वाला हो ।
(१२) लग्न से और गुरु के स्थान से पञ्चम स्थान में ३ या कम रेखा हों तो
बहुत कम संतान हो ।
(१३) गुरु से पञ्चम स्थान में जितनी रेखा हों उतनी संतान होना बताया गया
है परन्तु नीच या शत्रु गृही ग्रह से तो फल ठीक नहीं होता ।
(१४) गुरु और लग्न से नवमेश उच्च या स्वगृही होकर केन्द्र में हो उस पर
४ से अधिक रेखा हो तो दंड देने का अधिकारी हो ।
(१५) गुरु अष्टक वर्ग में जब गोचर में उस राशि मे शनि जावे जिसमें सबसे |
कम रेखा हैं तब उस समय जातक की मृत्यु होती है ।
(१६) गुरु से पञ्चम स्थान का स्वामी जितने नवांश में हो उतनी संतान दों ।
(१७) गुरु से पञ्चम भाव की रेखा > गुरु योग पिड-+ २७-गेष नक्षत्र या उसके
त्रिकोण में जब शनि जावे, या रेखा+योगपिड <- १२ शेष राशि या उसके त्रिकोण में
जब शनि जावे तब संतान कष्ट होगा घमं ओर विद्या की हानि होगी ।
(१८) गुरु अ० वगं में गुरु से पाँचवें घर में जितनी शुभ रेखा हों उसमें से नीच
या शत्रु घर में जितनी रेखा हों उनको घटाना जो शेष वचे उतनो संतान होगी ।
शुक्र के अष्टक वग का विचार
शुक्र स्थिति राशि से सप्तम स्थान द्वारा स्त्री का विचार होता है ।
(१) इसी सप्तम स्थान एवं सप्तम से अष्टम स्थान में जो राशि हो उसकी
रेखाओं द्वारा पूर्ववत् रत्री के कष्ट का विचार होता है ।
जैसे शुक्र मीन पर है उससे सप्तम स्थान कन्या राशि है । शुक्र अ० वर्ग कन्या
की ४ रेखा हैं योगपिण्ड ४४ है । ४२ ४४=१७६ -: २७=६ ३ङन्शेष १४ चित्रा में
या इसके त्रिकोण धनिष्ठा और मृग० में जब शनि आयेगा तव स्त्री कष्ट होगा या