भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

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२५० : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड

( विपरीत वेध ) अर्थात्‌ उल्टा वेध हुआ । इस प्रकार वाम वेध स्थान में कोई ग्रह

होने से अशुभत्व दूर हो जाता है और वह शुभ हो जाता है जसे सूर्य १२ के अशुभ

स्थान में भी होकर वाम वेध से शुभत्व पा गया । क्रम वेध का उल्टा वांम वेध है ।

यह विपरीत वेध हिमालय और विन्ध्याचल के बीच के देशों में माना जांता है ।

समस्त देश भर को इसके विचार की आवश्यकता नहीं है ( परन्तु क्रम वेध सब स्थानों

में माननीय है।

नक्षत्र अनुसार गोचर फल विचार

जन्म तक्षत्र से कोई ग्रह गोचर में जिस नक्षत्र में हो गिनकर उसका फल विचार￾१ सूर्य २ चन्द्र ३ मंगल

न० सं० अंग प्रभाव न०सं० अंग प्रभाव न० सं० अंग फल

१ पहिला मुख नाश १-२ मुख वड़ा भय १-२ मुख मृत्यु और

शोक समाचार

२से५ सिर ऐश्वर्य ३-६ सिर कुशल ३-८ पैर शत्रुता कलह

(उन्नति)

६-९ छाती सफलता ७-८ पीठ शत्रु पर ९-११ गर्दन सफलता

जीत

१०-१३ दाहिना दान द्रव्य ९-१० नेत्र धन लाभ १२-१५ बाँया धन हानि

हाथ आगम हाथ ` :

१४-१९ पैर द्रव्य हानि ११-१५छाती मानसिक १६-१७ सिर लाभ

प्रसन्नता

२०-२३ बायाँ हाथ देह पीड़ा १६-१७ बाँया शत्रुता १८-२१ मुख भय की (बीमारी) हाथ वृद्धि २४-२४ नेत्र लाभ १८-२३ पैर घर पर २२-२५ दाहिना कुशलता

वास हाथ

२६-२७गुह्य देह नाश २४-२७ हाहिना धन लाभ २६-२७ नेत्र यात्रा

या भारी हाथ

रोग ४-बुघ ५-गुरु ६-शुक्र ७ शनि ८ राहु € केतु न० स० अङ्ग फल न० सं० अंग फल

१-३ सिर दुःख २-५ बाँया हाथ दुःख ४-६ मुख लाभ ६-८ दाहिना हाथ यात्रा ७-१२ हाथ लाभ ९-११ बाँया पैर नाश १३-१७ पेट अचानक १२-१५ दाहिना पर लाभ घटना अनर्थं

१८-१९ गुह्य धन लाभ १६-२० पेट नाना भोग