भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

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ग्रहों की दृष्टि का फल: ९

चन्द्र पर शुभ ग्रह दृष्टि सुखी, रोग रहित, बांधवों के हारा लाभ ।

४१२ मित्र ,, „ लाभ, जय क्षेत्र तथा देश का लाम ।

पापांशक में चन्द्र हो या पाप ग्रह की दृष्टि हो तो शठ बुद्धि, परस्त्रीरमण ।

शुभांशक में चन्द्र हो या शुभ ग्रह की दृष्टि हो तो यशस्वी (जा० पारि०) ।

राशि का जो फल कहा है वही नवांशक में भी विचारे, शुभग्रह की दृष्टि या

योग से शुभ फल होता है ।

उपरोक्त दृष्टि विचार में इन राशियों का चन्द्र हो और उपरोक्त ग्रहों की दृष्टि

हो तो क्या फल होता है । परन्तु चन्द्र के स्थान पर, लग्न पर भी इन ग्रहों की दृष्टि

का उपरोक्त फल विचारना । संक्षिप्त में चन्द्र पर ग्रहों की दृष्टि या चन्द्र की इन ग्रहों

पर दृष्टि होने का फल यहाँ दिया है ।

चाहे चन्द्र द्रष्टा हो या दृश्य इस प्रकार फल होगा चन्द्र

राशि मेष वृष मिथुन कर्के सिंह कन्या तुला वृश्चिक धन मकर कुम्म मीन

सूर्य दरिद्री नौकर दरिद्री हृदय राजा स्त्रियों धानको दरिद्री दंभिक दरिद्री पर पाप

रोग का स्त्री कर्मी

आश्रय रत

मंगल अधि-दरिद्री शास्त्र झग-राजा ,, » राजा ,, राजा ,, # कारी बेचे ड्रालू

शनि चोर धनवान्‌ कपटी शत्रु माली ,, » अँगहीन ,, द्रव्यवान्‌ ,,. „,

बुध पण्डित चोर राजा काव्य जोगी सेना- राजा यमल पोषण राजा राजा भट

कर्ता पति संतान करता

गुरु काम- साहू- प डित पंडित साहु- सपं सुनार नम्र हो राजा ,, कार--राजा

दार कार कार कर्म साधक बारी

शुक्र गुमास्ता राजा निर्भय राजा राजा जोशी बनिया धोबी आश्रय पंडित परस्त्री पंडित

दाता आधीन

चन्द्र के नवांश पर ग्रहों की दृष्टि का फल

(१) चन्द्र मंगल (१-८ र[०) के नवांश में हो उसपर इन ग्रहों की दृष्टि का--

“फल सूर्यं की-नगर रक्षक, मंगल की-प्राणघाती,बुध की-युद्ध कुशल, गुरु की-राजा या

धनवान्‌, शुक्र की-कलहकारी ।

(२) चन्द्र शुक्र (२-७ रा०) के नवांश में हो उस पर दृष्टि का फल--सूर्य की-

मूर्ख, मंगल की-परस्त्रीगामी, बुध की-सुकवि, गुरु को-अच्छा लेखक या सूकवि,

शुक्र की-सब सुख प्राप्त, शनि की-परस्त्री से संग ।

(३) चन्द्र बुध (३-६ रा०) के नवांश में हो उस पर दृष्टि का फल-ूर्ये

की-नट या मल्ल, मंगलकी-चोर, बुध की-श्रेष्ठ कवि, गुरु की-मंत्री, शक्र की--

संगीतज्ञ, शनि की यन्त्र कलादक्ष यो शिल्पी ।