सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 176, कुल 454 में से
संदर्भ में पढ़ें१६८ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड
जब १२ वाँ शनि हो तो-शनि की दृष्टि । जन्म राशि में-शनि का भोग । और द्वितीय स्थान में-शनि की लात कही जाती है। जिसका दीर्घ जीवन है उसके जीवन में ३ बार साढे साती आती है । पहिले फेरे में इनमें सब या कुछ बुरा फल देता है परन्तु आक्रमण बड़े वेग से होता है और नाना प्रकार से व्यथित कर देता है । दूसरे फेरे में साढे साती का वेग वहुत धीमा हो जाता है कभी-कभी दुःख तो अवश्य होता है परन्तु यथार्थ में उतना हानिकर नहीं होता । दूसरे फरे में किसी को कुछ अच्छा भी फल देता है जिससे उन्नति होती है। परन्तु तीसरा फेरा अर्थात् अन्तिम साढ़े साती प्रायः मृत्यु को ही बुला छाती है कोई भाग्यवान् हो इस साढे साती को पाता है ।
साढ़े साती सदा अनिष्ट जाती है ऐसा नहीं है । जव शनि और चंद्र इनकी युति योग, केन्द्र योग या प्रति योग हो तो उस समय साहे साती में विशेष त्रास होता है । साढ़े साती का शुभाशुभ विचार
प्रत्येक राशि के साढ़े साती समय में कौन समय शुभ या अशुभ है यही वताया जाता है--
१-मेष राशि-मीन का पहिला २॥ वपं अति अशुभ मान, धन, मनुष्य की हानि हो । वृष का अंतिम २॥ वर्ष शुभ है ।
२-वृष-मेष का २॥ वर्ष अशुभ । वृष का २॥ वषं शुभ । मिथुन का शुभ धन आदि प्राप्त के लिये अनुकूछ है ।
३-मिथुन राशि-वृष का २॥ वर्ष शुभ, ककं का २॥ वपं शुभाशुभ, सिंह का २॥ वर्ष अशुभ ।
४-कर्क राशि-मिथुन का २॥ वर्ष शुभ, ककं का २॥ वषं शुभाशुभ, सिंह का २॥ वर्षे अशुभ ।
५-सिंह राशि-क्रकं २॥ वर्ष अशुभ, । सिंह २॥ वर्ण अशुभ। कन्या २॥ वपं शुभ।
६-फन्या राशि-सिंह का २॥ वर्ष अशुभ, कन्या का शुभ, तुला का अति शुम ।
इस समय अचानक धन स्थावर मशीन लाभ व श्रेष्ठ दर्जे का शुभ फल मिले ।
७-तुला राशि-कृच्या का शुभ, तुला का अति श्रेष्ठ, वृश्चिक का अति अशुभ ।
८-वृश्चिक राशि-तुला का श्रेष्ठ, वृश्चिक का कनिष्ठ, धन का मध्यम ।
९-धन राशि-तृश्चिक् का अशुभ, धन का शुभ, मकर का मध्यम ।
१०-मकर राशि-धन का शुभ, मकर का मध्यम, कुंभ का उत्तम ।
११--कुंभ राशि-मकर का साधारण. कुंभ का शुभ, मोन काशुभ।
१२--मीन राशि-कुंभ का शुभ, मीन का शुभ, मेष का अशुभ फल ।
विशेष विचार-साढ़े साती का फल विचार करते समय शुभाशुभ भाव शुभाशुभ
ग्रहों की दृष्टि एवं योग पर भी ध्यान देना ।
अन्य मत से साढ़े साती का अनिष्ट समय
मेष राशि को दुसरा २॥ वषं वृष राशिको प्रारम्भ के २॥ वर्ष