सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 177, कुल 454 में से
संदर्भ में पढ़ेंगोचर विचार : १६९
वृश्चिक राशि अंत के ५ वर्ष मिथुन राशि “अंत के २। वषं घनराशि >्पहिले ५ वर्ष ककं राशि =दूसरा २॥ वर्ष मकर राशि ज्यहिले २॥ वषं सिंह राशि पहिले ५ वर्ष कुंभ राशि =भंत के २॥ वषं
कन्या राशि =्पहिले २॥ वषं मीन राशि =अंत के २॥वपं
तुला राशि =अन्त के २॥ वषं
शनि की साढ़े साती में तीनों स्थान का फल
१--व्यय में शनि-व्यय की मात्रा अधिक, अकस्मात् धन हानि, एक स्थान में
शांति पूर्वक वास कठिन हो । स्वास्थ्य भी बिगड़े ।
२-णलग्न में शनि-शरीर की शांति एवं स्वास्थ्य में हानि, चित्त में अशांति, धन
का व्यय धन हानि, कार्य में विघ्त, कार्य असफल होने से धन का खच ।
३--धन में शनि-बन्धु वर्गों से अनायास निरथेक झगड़ा, कुटूम्वियों को रोग या
किसी की मृत्यु के कारण अधिक खर्च ।
जन्म कुण्डली से साढ़े साती का विचार
१--अन्म कुंडली में शनि ६-८-१२ भाव में होकर अशुभ ग्रह से युक्त या ६
दुष्ट हो तो अशुभ फल ।
२--जन्म चन्द्र यदि २ या १२ भाव में होकर मंगळ, सूर्य, राहु से युक्त हो तो
अशुभ फल ।
३--जन्म चन्द्र निवंछ हो शुभ ग्रहों से दृष्ट नहीं हो तो साढ़े साती का अशुभ
फळ होता है।
४- जन्म चन्द्र यदि वृश्चिक या शत्रुराशि में होकर राहु केतु मंगल से युक्त'व
दृष्ट हो तो अशुभ है ।
५--जन्म चन्द्र के २ और १२ भाव में शुभ ग्रह हो या इनपर शुभ दृष्टि हो तो
शुभ फल होता है ।
६--जन्म चंद्रके २-१२ स्थानमें कोई ग्रह न हो तो भी साधारण शुभ फल मिलेगा।
७--जन्म चंद्र यदि गुरु शुक्र बुध से युक्त हो नो साढे साती का शुम फल होगा ।
८--जन्म चन्द्र शनि से युक्त हो पर मंगल से दृष्ट न हो तो साढ़े साती का
शुभ फल होगा।
९--जन्म चन्द्रमा तथा शनि २, ६, ८, १२, स्थान में हो व नीच के या पाप
राशि के सोथ हो या अस्तंगत तथा पापदृश्य या पाप युक्त होकर ८-१२ स्थान में पड़े
हों तो शनि की साढ़े साती अशुभ फल करेगी ।
१०--यदि जन्म में सबल चंद्र युक्त शनि (लग्न या चंद्रमा से केन्द्र या त्रिकोण में)
हो या राज्येश, लाभेश, पंचमेश से सम्बन्धित हो और शुभ ग्रह से युक्त या दृष्ट हो
तो सब प्रकार से सुख कारक होता है।