भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

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१७० : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड

जन्म चंद्र से शनि=१-६-११ स्थान में-स्वर्ण पाद=्सव प्रकार का सुख हो

» =रजत पाद=्अच्छा भाग्य, काम सफल

» उत्ताम्‌ पाद-समफल, मध्यफल अच्छा न बुरा

„» सलोह पादस्धन नाश, दुःख दरिद्र दायक ।

शनि कीं साढ़ेसाती में शनि कब किस अंग पर है विचारना

फल नरपति-जयचर्योक्त शनि नराकार चक्र

हानि जन्म नक्षत्र से शनि के वर्तेमान नक्षत्र तक

हानि गिनना जिस अंग पर शनि आवे उसका

फल नीचे दिया है ।

“लाभ नक्षत्र क्रम अंग फल

लांभ १ मुख हानि

लाभ ४ दक्षिण भुज जय

लाभ ६ चरण भ्रम

भय शू हृदय श्री प्राप्ति मृत्यु ४ वाम भुज भय

जय ३ शीर्ष राज्य

सोख्य २ नेत्र सौख्य

पर्यटन २ गुह्य मृत्यु भय

योग २७

जन्म नक्षत्र से शनि जिस नक्षत्र पर हो उस नक्षत्र तक गिन के फल का विचार करना

शनि का चरण विचार

१ » रै-१०९

[7] कर =३-७-१०

71 ४. =४-८-१२

भाव मास अंग

व्ययस्थान ७ मस्तक

व्ययस्थान ९ नेत्र

व्ययस्थान ८ मुख

व्यथस्थान ६ कंठ

जन्मस्थान १० हृदय

जन्मस्थान ११ उदर

जन्मस्थान ५ नाभि

जन्मस्थान ४ गुह्यांग

धनस्थान १३ घुटना

घनस्थान १२ जंघा

धनस्थान ५ पाद

नारदोक्त शनि चक्र

नक्षत्र क्रम अवयव

१ ललाट

३ दुख

२ गुह्य

२ नेत्र

शर हृदय

४ वाम हस्त

३ वाम पाद

३ दक्षिण पाद

¥ दक्षिण हस्त

२७ नक्षत्र

फल उदाहरण

रोग जन्म नक्षत्र चित्रा हो और गोचर में

लाभ शनि आश्लेषा पर हो तो चित्रा से

हानि आश्लेषा तक गिनने से २३ संख्या

लाभ आई तो दक्षिण पाद के ३ नक्षत्रों

सौख्य में शनि आया जिसका फल इष्ट

बंधन यात्रा है 1

दुःख

इष्ट यात्रा

अर्थ लाभ