सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 179, कुल 454 में से
संदर्भ में पढ़ेंगोचर विचार : १७१
शनि वाहन विचार
शनि. के साढे साती प्रवेश समय के वाहन विचार से भी साढे साती के फल काः विचार होता है ।
रीति--जिस दिन शनि बदले उस दिन को ( तिथि--वार--नक्षत्र-स्वनाम के अक्षर )- ९=तिथिवार नक्षत्र संख्या और नाम के अक्षर की संख्या जोड़कर ९ का भाग दे दें जो शेष बचे तो वाहन जानना ।
शेष वाहन फल अन्य मत से १ खर (गदहा) हानि हो शेष ४ महिष के स्थान में २ अश्व (घोड़ा) जय स्यार तथा मेष वाहन कहते है ३ गज (हाथी) सोख्य जिसका फल अति लाभजनक ४ महिष (भँसा) मध्यम बताया गया है। ५ सिह र शत्रुनाश
६ जम्बुक (स्यार): शोक सन्ताप ७ वायस “काक) कलह
८ मयूर (मोर) लाभ
९ हंस सुख
अन्य मत से वाहन विचार-- जन्म नक्षत्र से गोचर में जिस दिन बदले उस दिन के नक्षत्र तक संख्या गिन कर ९ का भाग देना शेष पर से उपरोक्त वाहन के अनुसार ही फल जानना । न
वाहन पर विशेष विचार
१--साढे साती जो अशुभ फल देने वाली हो उस समय वाहन भी अशुभ फल दे दे तो साढ़े साती का विशेष अशुभ फल होगा ।
२--यदि अशुभ फल दायक साढ़े साती हो प्रवेश समय वाहन शुभ फलद हो तो विशेष अनिष्ट फल नहीं होगा मध्यम फल होगा ।
३-- शुभ फल दायक साढ़े साती हो और शुभदायक वाहन हो तो विशेष शुभ ।
४--शुभ फल दायक साढे साती में प्रवेश समय अशुभ फल दायक वाहन हो तो
मध्यम फल होगा ।
गोचर में जब शनि अपनी राशि से ४, ७ और १० स्थान में जाता है तो-मानसिक
दुख की वृद्धि करता है, जीवन को अव्यवस्थित करता है जिससे नाना प्रकार के दुःखों
का सामना करना पड़ता है ।
शनि चतुर्थ में-स्वास्थ्य बिगड़ता है, निवास में अवश्य ही परिवर्तन करता हैं ।
शनि सप्तम में-परदेश वास हो यदि सप्तम में चर राशि हो तो अवश्य फल हो।
शनि दशम में-नौकरी व्यवसाय आदि में गडबडी, कार्य में सफलता ।
(३) अळ्या शन्तिजन्म राशि से ४, ८ राशि में स्थित शनि अढेया शनि