भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

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१७४ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड

मंगल ०-२८ मेष १०° से वृष ८ तक २२-५-१९६२ चुघ १-२६ वृषदसे ककं ४ तक २०-७-१९६२

शनि १-६ ककं ४ से सिंह १० तक २७-८-१९६२ गुरु वृ-२८ सिंह १० से तुला ८ तक २५-१०-१९६२

राहु १-१२ तुला ८से वृश्चिक २० तक ६-१२-१९६२

शुक्र २-१० वृश्चिक २० से मकर ३०° तक १२-२-१९६३

अरिष्टकारी गोचर फल विचार

१--राहु-यदि जन्म में राहु धन या मीन राशि में हो तो जब गोचर में गुरु इस

राहु के बराबर राशि अंश में आता है तब अरिष्ट होता है । गुरु यदि उस राशि के

त्रिकोण में भी जाये तो भी अरिष्ट होना संभव है ।

२--राहू गुरु-यदि जन्म में राहु और गुरु साथ हों तो जव राहु को राशि से

गोचर का शनि त्रिकोण में आता है तब अरिष्ट होता है ।

३--षष्ठेश-षष्ठेश जिस राशि या नक्षत्र में हो उससे त्रिकोण में जब शनि आवे

सब मृत्यु का भय होता है। यदि उस समय कोई मारकेश या मृत्यु का योग न हो तो

जातक के किसी कुटुम्बी की मृत्यु होती है। गोचर में शनि कई बार सव राशियों

ओर नक्षत्रों में जाता है परन्तु मृत्यु तभी सम्भव होगी जब अन्य योगों से भी उसे

मृत्यु या अरिष्ट होना सम्भव हो ।

४--गुरु-लग्न था चन्द्र से तीसरे द्रेष्काण में गुरु हो तो उस द्रेष्काण के स्वामी

के त्रिकोण में जव गोचर में शनि जाये तब उस वर्ष में परदेश यात्रा, विवाद और

मृत्यु तुल्य कष्ट होता है।

५--अष्टमेश-अष्टमेश जिस द्वादशांश में हो उसके त्रिकोण में जब गोचर का

राहु आवे तब उस समय का अष्टमेश जिस राशि में बैठा हो उसके त्रिकोण में जब

सूये आता है तब उस मास में मृत्यु का भय संभव है । जैसे मान लो कुम्भ का मंगल

अष्टमेश है यह मिथुन के द्वादशांश में है । मिथुन से त्रिकोण तुळा और कुम्भ राशि हुई

जब गोचर में राहु तुला याकुंभ में जोयगा तो जातक को अरिष्ट होना संमव

होगा । यहाँ अष्टमेश कुम्भ का है जिसकी त्रिकोण राशि मिथुन और तुला है इससे जब

सूर्य मिथुन या तुला का होगा उसी मास विशेष अरिष्ट होने की संभावना है ।

६- त्रिक ( ६-८-१२ घर )--इन तीनों भावों के स्पष्ट को जोड़कर जो राशि

कला आदि प्राप्त हो उस राशि मंशादि में या उसके त्रिकोण में जब शनि आवे तक

अरिष्ट होना सम्भव है ।

७--अष्टमेश-अष्टमेश गत राशि के त्रिकोण में जिस समय गोचर का चन्द्र आता

है उस समय अरिष्ट सम्भव है ।

ग्रहों के अष्टक गग से गोचर फल

जन्म कुण्डली के ग्रहों का अष्टक वर्ग निकालो जिस ग्रह की अष्टक वर्ग चक्र में