भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

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पृष्ठ 183

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गोचर विचार : १७४५

'जिस राशि में शुभ रेखा अधिक हैं उस राशि में वह ग्रह शुभ फल देगा अष्टक वर्ग में = शुभ रेखाए हैं ।

यदि ६ रेखा हो तो ६ शुभ और २ शून्य अशुभ समझना, ७ रेखा हो तो १ कम

अर्थात्‌ डे हास होगा इँ फल शूभ होगा । ६ रेखा हो तो २ कम हुए अर्थात्‌ ६ शुभ

२ अशुभ होने से शेष=४ शुभ६-३ फल शुभ होगा । ५ रेखा होने से-३=हे= फल।

४ रेखा-४=० फल । ३ रेखा-५ मअशुभ=-हेै=-ई अशुभ फल होगा । २ रेखा-६

अशुभ---ई-ई अशुभ । १ रेखा-७ अशुभ=६=ई अशुभ फल । रेखा बिलकुल न हो

८ अशुभ रेखा हो तो पूर्ण अशुभ फल होगा । इसका प्रकार अष्टक वर्ग विषय के

चर्णन में यह सब समझा दिया गया है ।

२--यदि जन्मकालीन लग्न या चन्द्रसे गोचर का ग्रह उपचय (३-६-१०-११ घर)

में हो या मित्र ग्रह में हो या अपने उच्च या स्वक्षेत्र में हो और उस राशि में अष्टक￾वर्ग की ४ से अधिक शुभ रेखा हों तो शुभ फल की अधिक वृद्धि होती है ।

या यह अपचय (उपचय के अतिरिक्त स्थान) में अपने नीच या शत्रुगृही हो और

यदि उसमें अष्टकवर्ग की शुभ रेखा की अधिकता भी हो तो भी शुभ फल में न्यूनता

आ जोती है । यदि शुभ रेखा ४ से कम हो तो अनिष्ट फल प्रबल हो जाता है ।

३--गोचर का ग्रह यदि जन्म लग्न-या चन्द्र से उपचय में हो और शुभ रेखा भी

अधिक हो परन्तु निर्बल हो तो शुभ फल नहीं देगा अशुभता ही लायेगा ।

४--छोई भी ग्रह पूरे ३० अंश में भ्रमण करता है । उस ग्रह के अष्टकवर्ग चक्र

से पता लगेगा कि वह किसी विशेष राशि में क्रिस अंश में शुभ होगा कितने में अशुभ

होगा । अष्टकवर्श में ८ शुभ रेखा होती है। ३० अंश<- ८ रेखा>३९-४५' का एक

विभाग पड़ा (२) ७-३०” तक (३) ११-१५ तक (४) १५९-० तक (५) १८९-

४५ (६) २२९१-३० तक (७) २६-१५ तक (८) ३००-०' तक [|

इसका विचार पहिले अष्टकवर्ग चक्र से उदाहरण देकर समझा दिया गया है उस

चक्र में ग्रहों का क्रम शनि, गुरु, मंगल, सूर्ये, शुक्र, वुध, चन्द्र और लग्न के ही क्रम से

रखना बताया गया है । उदाहरण के लिए यहाँ शुक्र का अष्टक वर्ग लेते हैं । जिसमें

रेषा शुभ सूचक और शून्य अशुभ बताया है । शुक्र का अष्टकगगं चक्र जन्म कुण्डली के अनुसार उदाहरण स्वरूप

राशि ३ ४ ५ ६ ७ ८५ ९ १० ११ १२ १ २ अशुभ

गृहल.रा. . श. . - मं. के- गु. चं. सू. « - ग्रह ०-अशुश

बु. शु. अश

वृशनि । ० ० ० । । । ० ० | 1 । २ सड

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