सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 184, कुल 454 में से
संदर्भ में पढ़ें१७६ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड
इबुध । । ० ० | ० | ० ० ० | ० २२-३०
जता) ० ० । । ० । । 1 । 1 । २६-१५
८छलगा । ॥ ॥ । । ० ० । | ° 1 ० ३००
योग ५४२४ ८ ३ ४ ५३ ४ ६ ४
मान लो शुक्र गोचर में धनु राशि में है यह जन्म राशि कुंभ से ११ अर्थात्
उपचय में है। यहाँ धनराशि में उपरोक्त चक्र में ४ शुभ रेखायें हैं और ४ शून्य
अशुभ सूचक हैं। शुमाशुभ बराबर हो जाता है। यह आरम्भ में १ रेखा पाया है
उसमें ३- तक शुभ होगा । दुसरे-तीसरे ओर चौथे भाग में १५"-० तक शुभ
रेखा न शुभ न अशुभ फल | पांचवें छठवें सातवें भाग में १-१ शुभ रेख्ग होने से
२६-१५ शुभ होगा । अन्तिम भाग में शुभ रेखा न होने से ३०? तक अशुभ
हांगा । इस प्रकार गोचर फल कां गोचर के ग्रह की राशि से जन्म के अष्टकवर्ग चक्र से उस राशि के ग्रह की शुभता अशुभता कव तक रहेगो विचार लेना । यहाँ
तुला राशि में उसे प्री ८ रेखा मिली हैं और तुला शुक्र की मूल त्रिकोण राशि भी
है। जन्म राशि से नवम (त्रिकोण) में पड़ती है। इससे जब शुक्र गोचर में तुला राशि
पर आयगा तब अच्छा फल देगा । इसी प्रकार प्रत्येक ग्रह के अष्टकवर्ग चक्रसे विचार
लेना । अष्टकवर्ण के वर्गेन में इसका और भो स्पष्ट विचार किया है ।