भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

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अध्याय ७

सर्वेतोभद्र चक्र

उत्तर(बायौ) “

(सीधा) परिचम

चित्रा 1 इस्त

दक्षिण (दाहिना)

किसी नक्षत्र में ग्रह हो उसकी दृष्टि से इस चक्र में ३ वेध होते हैं एक बाई ओर

दूसरा सामने, तीसरा दाहिनी ओर ।

दो भूजाओं में चाहे दाहिना या बायाँ वेध हो, कोई ग्रह नक्षत्र एक राशि एक

स्वर से होगा उनका ही वेध होगा और किसी से नहीं ।

उदाहरण--कृतिका में ग्रह-तिरछा अ, वृष, नंदा, भद्रा, तुला, त, बिशाखा से

वेध । पश्चिम छोर पर सीधा श्रवण से भी वेध ।

रोहिणी में ग्रह हो-ऊपर उत्तर की ओर तिरछा अ, अश्विनी । नीचे तिरछा

दक्षिण की ओर व, मिथुन, और कन्य। र, स्वाती । सामने पश्चिम छोरमें अभिजित्‌ ॥

मृग० में ग्रह हो तो तिरछा दक्षिण को क, कर्क, सिह प, चित्रा और उत्तर में

तिरछा रेवती । सामने पश्चिम में उ०षा० इन सबसे वेध होता है ।

ऊपर तीर के निशान द्वारा चक्र देखने से यद्द सब समझ पड़ेगा ।

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