सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 185, कुल 454 में से
संदर्भ में पढ़ेंअध्याय ७
सर्वेतोभद्र चक्र
उत्तर(बायौ) “
(सीधा) परिचम
चित्रा 1 इस्त
दक्षिण (दाहिना)
किसी नक्षत्र में ग्रह हो उसकी दृष्टि से इस चक्र में ३ वेध होते हैं एक बाई ओर
दूसरा सामने, तीसरा दाहिनी ओर ।
दो भूजाओं में चाहे दाहिना या बायाँ वेध हो, कोई ग्रह नक्षत्र एक राशि एक
स्वर से होगा उनका ही वेध होगा और किसी से नहीं ।
उदाहरण--कृतिका में ग्रह-तिरछा अ, वृष, नंदा, भद्रा, तुला, त, बिशाखा से
वेध । पश्चिम छोर पर सीधा श्रवण से भी वेध ।
रोहिणी में ग्रह हो-ऊपर उत्तर की ओर तिरछा अ, अश्विनी । नीचे तिरछा
दक्षिण की ओर व, मिथुन, और कन्य। र, स्वाती । सामने पश्चिम छोरमें अभिजित् ॥
मृग० में ग्रह हो तो तिरछा दक्षिण को क, कर्क, सिह प, चित्रा और उत्तर में
तिरछा रेवती । सामने पश्चिम में उ०षा० इन सबसे वेध होता है ।
ऊपर तीर के निशान द्वारा चक्र देखने से यद्द सब समझ पड़ेगा ।
१२