भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

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१७० : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, तृतीय फित खण्ड

नंदा तिथि १-६-११, भद्रा तिथि २-७-१२, जया तिथि ३-८-१३, रिक्ता, ४-९-१४, थूर्णा तिथि ५-१०-१५ या अमावस ।

नाम के अक्षर में जो स्वर हो वही स्वर उस वर्ण का स्वर कहलाता है। इधसे चेध का विचार होता है।

इस चक्र में अक्षर से, स्वर से, नक्षत्र से, राशि से, तिथि से, और गोचर में ग्रह ग्जस राशि या जिस नक्षत्र में हो उससे जन्म नक्षत्र के वेध का विचार होता है ।

गोचर के ग्रह वर्तमान में जिस नक्षत्र और राशि में हों स्थापित कर उनका फल विचारना ।

जब नक्षत्र से वेध होता है तो गड़बड़ी होती है । जब अक्षर से वेध होता है तो हानि होती है । जब स्वर से वेध होता है तो बीमारी होती है । जब तिथि या-राशि से वेध होता है तो बहुत बड़ी रुकावट होती है ।

इनमें इकहरे वेध से लड़ाई में खतरा,र से वेध हो तो धन हानि, ३ से वेध हो तो ` बाधा, ४ से वेध हो तो मृत्यु भय, लगातार ५ से वेध हो तो मृत्यु होगी ।

नक्षत्र आर्द्रा, हस्त, पूर्वाषाढ़ा और उत्तर भाद्र पद में ४ केन्द्र के हैं इनमें जू दुसरे से रेखा खींचो तो चारों कोनों में ३ त्रिकोण वन जाते हैं। इन चार कोण में कोई ग्रह कहीं जाता है तो ४ स्वर अ, आ, इ, ई का वेध हो जाता है और पुर्णा तिथि का भी।

यहाँ चक्र में जो नक्षत्र दिये हैं और उनके समीप जो अक्षर दिये हैं ये उस नक्षत्र के होड़ा चक्र के अनुसार दिये अक्षरों से ही एक अक्षर है । क्योंकि यहाँ एक नक्षत्र के चारों चरणों के चार अक्षर देने का स्थान नहीं है इससे एक ही दिया है। ऊपर बताये केन्द्र के ४ नक्षत्र हैं। आर्द्रा का अक्षर होड़ाचक्रानुसार क घ ङ छ है, हस्त का पुष ण ठ है, पुर षा० का भू ध फ ढ़ है, उ भाद्र० का दुथ झ न है इनके सब अक्षर नहीं दिये परन्तु इनके चोखटे में एक नक्षत्र के पहले चरण का दूसरे के पहिले चरण से वेध होता है जैसे हस्त के दुसरे चरण का ण वेध उषा के दुसरे चरण के अक्षर से होता है इसी प्रकार और भी समझना । इसमें स-श, ब्व, घ-ख, थस्छ, त्र-त, जरग ये बराबर हैं । इनमें किसी एक से वेध हो तो दूसरे से भी वेध होना समझा जायेगा । शुभ ग्रह का वेध सौम्य वेध होता है ।

यहाँ शतपद चक्र दिया है । जिसमें २८ नक्षत्रों के प्रत्येक चरण के एक-एक अक्षर दिये हैं। इस चक्र में २८ नक्षत्रों के ११२ अक्षर है । जिनमें से विना मात्रा के अक्षर केवल इस सर्वतों भद्रचक्र में यहाँ दिये क्रम से ही दिये हैं जिससे उन अक्षरों के क्रम का पता चळ जायगा । इसी स्पष्टीकरण को यह चक्र यहाँ दिया है—