भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

पृष्ठ 199, कुल 454 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 199

सूयंकालानल चक्र : १९१

लिखना गोचर में सूर्य जिस नक्षत्र में है वह नक्षत्र यहाँ लिखना । इस प्रकार अभिजित सहित २८ नक्षत्रों के नाम आगे क्रमानुसार लिख देना यहाँ बताये हुए बाई ओर से क्रमशः लिखना। अपने नाम का नक्षत्र जहाँ हो वहाँ लिख देना इससे रोग विवाद, युद्ध, यात्रा आदि में इससे विचार होता है ।

फल

१--नीचे (त्रिशूल वाली रेखा के नीचे) के नक्षत्रों में अपना जन्म नक्षत्र पड़े तो

क्रम से १-चिन्ता २-वध ३-सव कार्यों में रकावट हो ।

२--दोनों श्व्‌ग में-रोग और भय ।

३--त्रिशुल में मृत्यु ।

४--शेष नक्षत्रों में-जय लाभ अभीष्ट सिद्धि हो :

४--जन्म राशि से ग्रहों के वेध का इस प्रकार फल होगा

सूर्य के वेध से-मन को ताप गुरु के वेध से-धन लाभ ।

मंगल के वेध से-द्रव्य हानि शुक्र के वेध से-रत्न लाभ ।

शनि के वेध से-रोग जन्य पीड़ा चन्द्र के वेध से-स्त्री लाभ ।

राहु केतु.के वेध से-मृत्यु बुध के वेध से-सुख ।

'डिभ चक्र या सूर्य नराकार चक्र--

सूर्य जिस नक्षत्र में हो उसे सिर पर स्थापित कर वहाँ से जन्म नक्षत्र तक गिनने

में जिस अंग पर जन्म नक्षत्र पड़े उससे निम्नलिखित फल का विचार करे ।

नक्षत्र संख्या अंग फल

३--सिर-श्रेष्ठ रत्न, सोना, सुन्दर वस्त्र, भोजन, राज्य सुख प्राप्त ।

४--मुख-मिष्ट भोजन, शैया आदि आसनों का भोगी व बोलने वाला, हंसता

मुख सदा प्रसन्न चित्त ।

१--दाहिना कंधा-व्ंश में भूषण समान, बड़े उत्सव युक्त, अति उदार, बड़ा

शूर वीर ।

१---बायाँ कंधा-अग्रणी, हाथी पर चढ़ने वाला ।

२--दाहिनी बाँह-अपने देश को त्यागे, बड़ा अभिमानी, वीरता युक्त परदेश में

रहकर ।

१--बाई' बाँह-बड़ी प्रतिष्ठा प्राप्त करता है, स्थान भ्रष्ट ।

१--दाहिना हाथ-उदार, श्रेष्ठ गुणरहित,व्यापार में .रत्नों की परीक्षा करनेवाला ।

पृ--बायाँ हाथ-सच और झूठ सहित चोर हो ।

५--हृदय में-स्व कुटम्ब में राजा के समान श्रेष्ठ शील वाला, शास्त्र में प्रवीण

विशाल श्रेष्ठ यज्ञस्वी व समर्थ ।

१--नाभि-दयालु, युद्ध में डरपोक, शास्त्र में प्रवीण, धर्म में वृत्ति, निरन्तर

उदार अनेक कला जानने वाला, थोड़े में संतोष ।

१--मुंह्मय-बड़ा कामी, साधु कर्मो से हीन, गीत और नृत्य में प्रेम, कलाओं को जानने

वाला, बड़ा यश वाला ।

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २ · पृष्ठ 199, कुल 454 में से · BharatKosha