भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

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२०८ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड

उस खंड में ग्रहों के अनुसार सुख दुःख का अनुमान करना । जैसे किसी की आयु ८५

वर्ण की प्रकट हुई इसके ३ भाग किये २५ वर्ण प्रत्येक खंड के आए । अब कुण्डली

में उपरोक्त प्रकार से बताये तीनों खंडों के शुभाशुभ ग्रहों का विचार करो जिस खंड

में शुभग्रह अधिक होंगे सुख होगा । पाप ग्रह अधिक होंगे तो दुःख होगा । यहाँ प्रथम

खंड में २५ वर्ष पश्चात्‌ द्वितीय खंड में २५ वर्ण पश्चात्‌ तृतीय खंड मे २५ वर्ण के

हिसाव से आय खंड के अनुसार सुख दुख का विचार करना ।

इसमे जिस खंड में बहुत पोप ग्रह या नीचांशक या अस्तंगत ग्रह हो उस खंड में

दुःख पदच्युत आदि होता है जिसमें शुभ ग्रह अधिक उच्चांशक आदि होते हैं उस खंड

में सुख ऐश्वर्य आदि प्राप्त होता है ।

पूर्वाद्ध उत्तराद्ध ज्योतिष चक्र के अनुसार शक्ति प्राप्ति

लग्न से ६ भाव तक पूवाद्ध हैं, ७ से १२ भाव तक पश्चिमाद्ध है ।

ज्योतिष चक्र के पूर्वाद्ध में उच्च के तथा बलवान्‌ ग्रह हों तो राजा के समान

शवित और धन. जीवन के पूर्व भाग में प्राप्त हों ।

यदि पश्‍चिमाद्ध में उच्च और बलवान्‌ ग्रह हों तो जीवन के अन्तिम भाग में

शक्ति और सफलता रेते हैं ।

जो पूर्वाद्ध और पश्चिमाद्धं दोनों में उच्च के और बलवान्‌ ग्रह हों तो उसे जीवन

भर शक्ति और उन्नति प्राप्त हो ।

मृत्यु समय

कुण्डली में शनि. गुरु, सूर्य ओर चन्द्र का स्पष्ट जोड़ने से जो प्राप्त हो उस स्पष्ट पर जब शनि पहिले चक्कर में पहुँचे तो उस समय अल्पायु योग वाले की मृत्यु होगी । जब दुसरा चक्कर शनि लगाकर उसी स्पष्ट पर पहुंचे तव माध्ययु वाले की मृत्यु होगी । जव तीसरी वार चक्कर लगाकर शनि उक्त स्थान पर पहुंचे तो दीर्घायु वाले की मृत्यु संभव है।

ग्रहों की दशा अंतर्दशा पर से कष्टकर या मृत्यु संभव समय का अनुमान कर लेना चाहिये ,

अरिष्ट समय

(१) जिन अरिष्टों में फल का समय नहीं दिया उनमें योग करने वाले ग्रहों में से जो वलवान्‌ हो उसकी राशि पर जब गोचर में चन्द्रमा हो उस समय अरिष्ट होगा ।

(२) अथवा अपनी राशि में या लग्न राशि में चन्द्रमा गोचर में जब जाय या वल युक्त हो तो १ वर्ष के भीतर मृत्य हो ।

अवस्था के कुछ योग

ग्रह आयु--मंगळ बुध सूर्य गुरु शनि राहु चन्द्र शुक्र युवा बालक वृद्ध अधेड़ (मध्यम) वृद्ध युवासम हो-ळग्नेश लग्न में हो यो वलवान्‌ ग्रह लग्न में हो और लाभ स्थान