भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

पृष्ठ 237, कुल 454 में से

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पृष्ठ 237

आयुर्दाय विचार : २२७

में मंगल सूर्य शनि हो (छ० चं०)। ६१-चन्द्र से केन्द्र में पाप ग्रह हों शुभ ग्रह न हों (स० चि०) । ६२-- अष्टम में सुर्य मंगल और शनि शत्रु क्षेत्री हों (मान०)। ६३- लग्न में चन्द्र हो विना शुभ योग के पाप ग्रह केन्द्र में हों (सवै चि०)। ६४- ग्न में वलवान्‌ सूर्य या चन्द्र हो पाप गृह अष्टम या केन्द्र या कोण में हो [ स० चि० ]। ६५-सूय्य चन्द्र शुक्र लग्न में हो पाप गूह अष्टम में या केन्द्र कोण में हो (स० चि० )। ६६-जन्म राशि से अष्टम में सूयं हो उस पर शुक्र की दृष्टि हो

( प्रा० यो० ) । ६७-शनि और मंगल लग्न में, तीसरे घर में राहु हो ( मान० ) ।

६८--छग्न से सप्तम में शनि, वारहूवें भाव में गुरु शुक्र और राहु एकत्र हो (मान०) ।

६९-- क्षीण चन्द्र पाप युक्त १, ५, ७, ८, ९ भाव में हो शुभ ग्रह सेदृष्टन हो

( प्रा० यो० ) ।

१ वर्ष आयु--७०-अदृश्य भाग में पाप गूह दृश्य भाग में शुभ गृह हो लग्न में राहु हो ( प्रा० यो ) 1

२ वर्ष आयु--७१-चन्द्र शनि युक्त हो सूर्य चन्द्र शुक्र केन्द्र में हों, शुभ गूहों से भी भावित कयो न हो २ वर्ष में मृत्यु हो (मान०) । ७२-वक्री शनि मंगळ के घर का होकर केन्द्र या छटे आठवें घर में हो बली मंगल उसे देखता हो (मान०) [स०चि०] । ७३-बुध चन्द्र केन्द्र में हो अस्तंगत हो उसे मंगल शनि देखते हों [ जा० भ० ] [प्रा० यो०]। ७४-६-८ के स्वामी केन्द्र में हों, वक्ती शनि मंगल के घर का हो और वलवान्‌ मंगल की दृष्टि हो [स० चि०]। ७५-वक्रो शनि मंगल के स्थान में

या केन्द्र या ६-८ घर में हो वली मंगळ में दृष्टि हो [ल० चं] ।

अन्यमत--वक्रो शनि मंगल के घर मेष या वृश्चिक का हो चन्द्र १, ४, ७, १० या ६-८ भाव में हो बलवान्‌ मंगळ की दृष्टि हो । ३ वर्ष आयु--७६-जग्नेशसे चन्द्रमा अष्टम हो कृष्ण पक्ष का जन्म हो सव पाप

गूह्‌ उस चन्द्र को देखते हों शुभ गृह की दृष्टि न हो तो ३ वर्ष में मृत्यु हो [स० चि०] ७७- गुरु लग्न से १२ वें घर या केन्द्र में पाप ग्रह युक्त हो लग्नेश ३-६-९ घर में कहीं हो [जा० भ०]। ७८-ककं लग्न में मंगळ और चन्द्रमा हों केन्द्र व अष्टम माव में कोई गृह न हो [जा० छ०]। ७९-गुरु अष्टम में मंगळ के घर का हो और सूर्य चन्द्र मंगल शनि की दृष्टि हो शुक्र की दृष्टि न हो [ स० चि० ] । मेष ओर कन्या "लग्न में ये योग संभव है । ८०--छश्न में शनि, सप्तम सूर्ये या अष्टम में मंगल हो

[स° चि०] । सूर्यं और मंगल तीसरे घर में होया पाप राशियो में हो जिन पर पाप दृष्टि हो तो बीमार रहे कठिनता से ३ वपं जिये [स० चि०]। ८२-मंगलू का घर

६-८ भाव या कहीं केन्द्र में हो उस पर शनि को दृष्टि हो ।

४ वर्षे आयु--८३-६-८ घर में चन्द्र शुभ और अशुभ ग्रह से दृष्ट हो [मान०]

[जा० सं०] । ५४-शन्रु क्षेत्री बध लग्न या ६ घर में हो [ मान० ] । ८५-शम्‌, क्षेत्री

बुध ६ या ८ घर में हो [मान०]। ८६-ककं का वुध ६-८ घर में हो उस पर चंद्र

की दृष्टि हो (जा० पारि०) । ८७-मंगळ केन्द्र में अस्तंगत हो शनि युक्त या दुष्ट हो

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