सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 236, कुल 454 में से
संदर्भ में पढ़ें१२६ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड
खान या नक्षत्र में जन्म हो तो २ महीने में मृत्यु हो [ स० चि ]। लग्न में केतु हो
त्तो दो महीने में मृत्यु [ प्रा० यो० ] । केवल लग्न में केतु होने से मृत्यु नहीं होती
अष्टम में सूर्य मंगल शनि हो और लग्न में केतु हो तो २ मास में मृत्यु होगी । जिसका
जन्म धूम्र केतु तारे के उदय नक्षत्र में हो वह् २ मास में मरता है [ जा० भ० ] ।
२ या ६ मास में नृत्यु--४०-आपोक्लिम [ ३-६-९-१२ ] भावों में सभी गृह
बलहीन हों तो २ या ६ मास में मृत्यु हो [ स० चि० ] [ वि० प्रा० ]।
२-६-१२ मास आयु--४१-लग्न से १२, २, ८, ६ स्थान में पाप गृह हों
शुभ गूहों से युक्त न हों तो २, ६ या १२ मास में मृत्यु हो ।
२॥ मास में मृत्यु --४२-चन्द्र के नवांश में सप्तमस्थ मंगल हो शुभ दृष्ट
रहित हो तो ७७ वें नक्षत्र २॥ मास में मृत्यु हो [ जा पारि० ]। ४३-शनि मंगल और सूर्य पंचम में हो ( जा० पारि० )
३ पक्ष या ३ मास में ४४-जिसका जन्म ग्रहण व परिवेश ( शीड़ल ) के समय
हो लग्न में पाप ग्रह हो लग्नेश बलहीन हो तो ३ पक्ष या ३ मास में मृत्यु हो
(स० चि० )
३ मास में मृत्यु ४५-नवम में सूर्य, सप्तम शनि. लाभ में गुरु शुक्र हो ।
४६-षष्ठ में चन्द्र तृतीय में शनि हो लग्न में शुभ ग्रह की राशि हो ।
४ मास आयु ४७-लग्नेश अष्टम में हो पाप ग्रह से दृष्ट हो (जा० भ०) ४८- लग्नेश लग्न में सव पाप ग्रह अदृश्याद्ध १ से ३ भाव तक हों (स०चि०)
४९- लग्नेश मंगल लग्न में हो सव पाप ग्रहों से दृष्ट हो ( स० चि० ) । परन्तु मंगल स्वक्षेत्री उच्च या मूल त्रि० का हो तो आयु कुछ अधिक होगी ।
५ मास आयु ५०-छरन में शनि सूर्य शुक्र हो १२ वां गुरु हो ।
६ या ८ मास आयु ५१--पाप ग्रह २, १२ या ६, ८, या ८, ९ या ६, १२ भाव में हो तो ६ या ८ मास में मृत्यु हो । ( जा० भ० )। ८या १२ मास आयु ५२-६ या ८ भाव में चन्द्र पाप ग्रहों से दृष्ट हो तो शीघ्र मृत्यु होती है यदि ८ भाव को शुभ ग्रह देखे तो ६ महीने या वषं भर में मृत्यु
हो ( ल० च० ) ॥ द
८ मास में मृत्यु ५३-लग्न में मंगल, चतुर्थ में राहु, वारहवें शनि हो [मान०] । ५४-पाप ग्रह युक्त लग्नेश जन्म राशि पति सहित सप्तम भाव में हो पाप ग्रह से दुष्ट हो [ जा० सं० ] । |
९ मास में मृत्यु ५५-छग्न में पाप युक्त शनि हो तो ९ मास में मत्यु हो। १ वष आयु- ५६- देया ८ घर में एक भी पाप ग्रह हो जिस पर पाप ग्रह की दृष्टि हो तो १ वषं में मृत्यु हो [जा० भ०] । ५७-छग्न में शनि हो और पाप युक्त दृष्ट न हो [जा० भ०] तो १ वर्ष आयु । पाप युक्त दृष्ट से ९ मास आयु । ५८- अष्टम में चन्द्र चौथे में राहु केन्द्र में पाप ग्रह हो ( ल० चं० ) । ५९-एक भी पाप ग्रह अष्टम में हो पाप ग्रहों से दृष्ट हो शत्रु क्षेत्री हो (ल० चं)। ६०-६ या ८ घर