सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 235, कुल 454 में से
संदर्भ में पढ़ेंआयुर्दाय विचार : २२५
=-चन्द्र से सप्तम सूर्य मंगल हो या चन्द्र से सप्तम सूर्यं और लग्न में मंगल हो
[ स० चि० ]। ९-राह लग्न या अष्टम में हो चन्द्र से दृष्ट हो [ मान० ] ।
११ दिन में मृत्यु १०-मकर या कुम्भ में गुरु अष्टम घर में हो पाप ग्रह की
दृष्टि लग्न पर हो [ जा० भ० ]। ११-छन में राह लग्न या सप्तम में सूर्य मंगल
के साथ हो ।
१६ दिन में मृत्यु १२-छूग्न में शनि हो पाप गृह से दुष्ड हो [ जा० भ० ] ।
८ दिन ८ मास या ८ वर्ष में मृत्यु १३- ६-८-१२-२ घर में शनि शत्र क्षेत्री
हो [ मान० ] ।
२० दिन में मृत्यु .१४-चतुर्थ में राह ६-८ घर में चन्द्र हो [ मान० ] ।
१ मास में मृत्यु १५- लग्न से १२ वें घर में चन्द्र अष्टम में पाप गृह हो
[मान०]॥ १६-छरन से नवम में सूर्य, अष्टम में शनि, ११ वें घर में शुक्र हो ।
१७-लग्न से ६-८ घर में चन्द्र, सप्तम सूर्य हो तो माता-पिता का घन नाश कर
एक माह तक जिये [ मान० ]। १८- दशम में सूर्य या मंगल शनुक्षेत्री हो तो
आयु १ मास [ मान० ]। १९-लग्न में सूर्य, सप्तम में चन्द्र, अष्टम में पाप ग्रह
हो [ मान० ]।
आयु १ मास-२०- लग्न में मंगल १२वें में गुरु, छठे घर में शुक्र हो
[ मान० ]। २१-लग्न में क्षीण चन्द्र कूर ग्रह से दृष्ट हो २ या १२ घर में मंगल
हो । २२-६-८ घर या केन्द्र में मंगल के घर का सूर्य शनि चन्द्र युक्त हो [प्रा०
यो०] । २३-लग्नेश पाप गृह यक्त अष्टम में हो [ प्रा० यो० ]। २४-६-८ भाव में
शुभ गृह पाप गृह से दुष्ट हो [जा० पारि०]। २४-अन्य मत ६-८ भाव में शुभ गृह
हो वक्री पाप गृह से दृष्ट हो शुभ ग्रह की दृष्टि न हो [ प्रा० यो० ] [ जा० भ० ] 1
२६-छग्न या नवम में सूर्य, सप्तम में शनि, ११ वें गुरु शुक्र हो [ वृ० पा० ]। २७-
अष्टमेश अष्टम में और चन्द्रमा पाप युक्त हो उस पर शुभ दृष्टि न हो [ वृ० पा० ]
२८-सव पाप गृह ६-८ भाव में हों [ जा० सं० ]। २९-गुरु नीच में हो या मंगल के
घर का हो और संधित्रय [१] लग्न संधि [२] नक्षत्र संधि [३] दशा संधि में जन्म हो
[ स० चि० ]। ३०-अष्टम में सूर्यं मंगल शनि हो [ स» चि० ]। ३१-लग्न से
६ घर में शनि मंगल १२ स्थान में वुध, लग्न में चन्द्रहो । ३२-छग्न से नवम सूर्य,
अष्टम शनि और ११ वं शुक्र हो [ ल० चं० ]। ३३-६-८ घर में बुध गुरु या शुक्र
हो जिस पर बलवान् पाप गृह की दृष्टि हो | व्» आ ]। ३४-लग्नेश पाप युक्त व
पराजित गृह युद्ध में पाप गह् से हारा हो | वृ० जा० | ३५-लग्न में शनि पाप ग्रह
युक्त हो [ ल० च० ] । ३६-६-८ घर में शुभ गृह से बली पाप ग्रह दृष्ट हो लग्नेश
सप्तम में हो और पाप गृह से पराजित हो [ जा० पारि० ] । ३७-६-८ घर में चन्द्र
हो कूर गृहों से दृष्ट हो [ ज्यो> शा» ]। ३८-लानेश सप्तम में हो और पाप गहों
से युद्ध में पराजित हो [ ज्यो» शा० ] 1
आयु २ मास--३९-जिसके लग्न में या जन्म नक्षत्र में कतु का उदय हो उस
Ef १५