भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

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आयुर्दाय विचार : २२५

=-चन्द्र से सप्तम सूर्य मंगल हो या चन्द्र से सप्तम सूर्यं और लग्न में मंगल हो

[ स० चि० ]। ९-राह लग्न या अष्टम में हो चन्द्र से दृष्ट हो [ मान० ] ।

११ दिन में मृत्यु १०-मकर या कुम्भ में गुरु अष्टम घर में हो पाप ग्रह की

दृष्टि लग्न पर हो [ जा० भ० ]। ११-छन में राह लग्न या सप्तम में सूर्य मंगल

के साथ हो ।

१६ दिन में मृत्यु १२-छूग्न में शनि हो पाप गृह से दुष्ड हो [ जा० भ० ] ।

८ दिन ८ मास या ८ वर्ष में मृत्यु १३- ६-८-१२-२ घर में शनि शत्र क्षेत्री

हो [ मान० ] ।

२० दिन में मृत्यु .१४-चतुर्थ में राह ६-८ घर में चन्द्र हो [ मान० ] ।

१ मास में मृत्यु १५- लग्न से १२ वें घर में चन्द्र अष्टम में पाप गृह हो

[मान०]॥ १६-छरन से नवम में सूर्य, अष्टम में शनि, ११ वें घर में शुक्र हो ।

१७-लग्न से ६-८ घर में चन्द्र, सप्तम सूर्य हो तो माता-पिता का घन नाश कर

एक माह तक जिये [ मान० ]। १८- दशम में सूर्य या मंगल शनुक्षेत्री हो तो

आयु १ मास [ मान० ]। १९-लग्न में सूर्य, सप्तम में चन्द्र, अष्टम में पाप ग्रह

हो [ मान० ]।

आयु १ मास-२०- लग्न में मंगल १२वें में गुरु, छठे घर में शुक्र हो

[ मान० ]। २१-लग्न में क्षीण चन्द्र कूर ग्रह से दृष्ट हो २ या १२ घर में मंगल

हो । २२-६-८ घर या केन्द्र में मंगल के घर का सूर्य शनि चन्द्र युक्त हो [प्रा०

यो०] । २३-लग्नेश पाप गृह यक्त अष्टम में हो [ प्रा० यो० ]। २४-६-८ भाव में

शुभ गृह पाप गृह से दुष्ट हो [जा० पारि०]। २४-अन्य मत ६-८ भाव में शुभ गृह

हो वक्री पाप गृह से दृष्ट हो शुभ ग्रह की दृष्टि न हो [ प्रा० यो० ] [ जा० भ० ] 1

२६-छग्न या नवम में सूर्य, सप्तम में शनि, ११ वें गुरु शुक्र हो [ वृ० पा० ]। २७-

अष्टमेश अष्टम में और चन्द्रमा पाप युक्त हो उस पर शुभ दृष्टि न हो [ वृ० पा० ]

२८-सव पाप गृह ६-८ भाव में हों [ जा० सं० ]। २९-गुरु नीच में हो या मंगल के

घर का हो और संधित्रय [१] लग्न संधि [२] नक्षत्र संधि [३] दशा संधि में जन्म हो

[ स० चि० ]। ३०-अष्टम में सूर्यं मंगल शनि हो [ स» चि० ]। ३१-लग्न से

६ घर में शनि मंगल १२ स्थान में वुध, लग्न में चन्द्रहो । ३२-छग्न से नवम सूर्य,

अष्टम शनि और ११ वं शुक्र हो [ ल० चं० ]। ३३-६-८ घर में बुध गुरु या शुक्र

हो जिस पर बलवान्‌ पाप गृह की दृष्टि हो | व्‌» आ ]। ३४-लग्नेश पाप युक्त व

पराजित गृह युद्ध में पाप गह्‌ से हारा हो | वृ० जा० | ३५-लग्न में शनि पाप ग्रह

युक्त हो [ ल० च० ] । ३६-६-८ घर में शुभ गृह से बली पाप ग्रह दृष्ट हो लग्नेश

सप्तम में हो और पाप गृह से पराजित हो [ जा० पारि० ] । ३७-६-८ घर में चन्द्र

हो कूर गृहों से दृष्ट हो [ ज्यो> शा» ]। ३८-लानेश सप्तम में हो और पाप गहों

से युद्ध में पराजित हो [ ज्यो» शा० ] 1

आयु २ मास--३९-जिसके लग्न में या जन्म नक्षत्र में कतु का उदय हो उस

Ef १५