सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 24, कुल 454 में से
संदर्भ में पढ़ें१६ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड
चन्द्र की--प्रसिद्ध नम्र, स्त्री का प्यारा, श्रेष्ठ पुरुषों की सलाह लेने वाला, धर्म
में तत्पर, शान्त स्वभाव ।
मंगल की- क्रूर, बड़ा धूर्त, दूसरे के अभिमान को नष्ट करने वाला, राजः के
आश्रय से आजीविका, बहुत मनुष्यों का स्वामी ।
बुध की--श्रेष्ठ वृत्ति और सत्य उत्तम बाणी से रहित, दूसरे का छिद्र देखने
वाला, नञ्ज, मनुष्यों का स्वामी, धूर्त ।
शुक्र की--गन्ध माला शैया, भोजन भूषण, स्त्री वस्त्र, स्थान इन सबसे सौख्य को
पाता है ।
शनि की--लोभी, क्रूर, हठी; मित्र ओर सन्तान के सुख रहित और सलाह करने
में कठोर । (२) बुध क्षेत्री गुरु पर दृष्टि सूर्य की-युद्ध में जय प्राप्त, भाव सहित, शरीर में रोग, वहुत वाहन और सेवक
युक्त राजा का मंत्री ।
चन्द्र की-सत्य युक्त, नम्रता युक्त; परोपकारी; श्रेष्ठ चित्त, श्रेष्ठ भाग्य वाळा ।
मंगल की--भाग्य युक्त, पुत्र सौख्य को प्राप्त, मिष्ठ भाषी, राजा से मान प्राप्त,
सदाचार युक्त ।
बुध की--श्रेष्ठ मन्त्र और विद्या में तत्पर, निरन्तर भाग्य सहित, राजा से धन
प्राप्त, सुन्दर कलाओं का ज्ञाता ।
शुक्र की--धन और भूषण सहित, श्रेष्ठ वृत्ति में चित्त, ऐश्वयंवान् ।
शनि की--श्रे ष्ठ पुत्र, श्रेष्ठ स्त्रियों के सुख युक्त, नगर और ग्राम में उत्सव युक्त
चतुर। (३) बुध क्षेत्री गुरु पर दृष्टि
सुर्य दृष्टि- श्रेष्ठ पुत्र,स्त्री, धन तथा गित्र सौख्य युक्त, श्रेष्ठ प्रतिष्ठा को प्राप्त.
शोभायमान । i
न चन्द्र की--गुणी, ग्राम ओर नगरों में उपकार करने करने वाला, वहुत गौरवसे
बा पत र घाव युक्त देह, धन पराक्रम युक्त ।
य बुध की--श्रेष्ठ बानी ओर स्त्री पुत्र धन सोख्य युक्त, चतुर, ज्योतिषी , शिल्प शास्त्र
व्य शुक्र की--धन, स्त्री पुत्रों के सुख से युक्त; युक्त, मकान वावली ली और खेती के काम में में
शनि की--राजा से श्रेष्ठ गौरव प्राप्त, नित्य उत्स ऐं से पर्ण
तथा ग्रामों का स्वामी । अ प
(४) ककं के गुरु पर दृष्टि
सूर्य की दुष्टि- स्त्री पुत्र घन के उत्पन्न सौख्य को पहिले नाश करता है और