सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 274, कुल 454 में से
संदर्भ में पढ़ें२६४ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड
(४) जब कहे हुए योग में से कोई योग न हो और लष्टम स्थान भी किसी ग्रह
से युक्त दृष्ट न हो तो लग्न से २८ वें द्रेष्काण का स्वामी और अष्टमेश इनमें जो
अली हो उसके कहे हुए बात पित्त आदि दोष से व पहिले बताये हुए अग्नि जल शस्त्र
आदि से मरण कहना । २२ वाँ द्रेष्काण लग्न से अष्टम राशि में होता है।
(५) लग्नेश व चन्द्र राशि फा शत्रु ग्रह लग्न में शुभ ग्रह भी होवे तो भी ग्रह
अपनी धातु के अनुसार धातु दोष से मृत्यु करता है ।
कोन ग्रह किस विकार से मरण करता है
जो ग्रह बलवान् होकर अष्टम भाव को देखता हो या अष्टम भाव में कोई ग्रह
हो इनमें जो बलवान् हो उसके विकार से मृत्यु होती है ।
सूर्य-पित्त रोग से । गुरु-कफ से ।
चन्द्र-वात कफ से । शुक्र-वात कफ से ।
मंगल-पित्त से । शनि-वात से ।
बुध-बातपित्त कफ या त्रिदोष ज्वर से राहु केतु-वात या भूत ज्वर से ।
शरीर में रोग कहाँ होगा
लान से अष्टम स्थान में जो राशि हो वह काल पुरुष का जो अंग सूचक हो ।
जातक के उसी गंग पर वातादिविकार होकर मृत्यु होती है या लग्न से अष्टम का
स्वामी लग्न में हो तो वह राशि जिस अंग में हो उस कालांग में रोग हो । मृत्यु का कारण हे स्वजनों से मरण--(१) सूयं चन्द्र कन्या राशि के हों और पाप ग्रहों से दृष्ट हों तो अपने ही मनुष्यों के हाथ मृत्यु हो । (२) पंचम और अष्टम भाव पाप ग्रहों से युक्त हो तो बंधुजनों के वश से मृत्यु हो ।
स्त्री के निमित्त मरण या स्त्री द्वारा मरण--(१) लग्न में शनि सूर्य, सप्तम में मंगळ चन्द्रमा हो द्वितीय भाव में शुक्र हो तो स्त्री के कारण मरण ( जा० भ० )। (२) मीन छन में सूर्य हो सप्तम भाव में पाप युक्त चन्द्र हो और मेष राशि में शुक्र हो तो वह स्त्री के दोष से अपने घर में मरता है ( वृ० जा० ) । (३) सप्तम में चन्द्र मंगळ शनि हो तो पर स्त्री के कारण मरण हो ( जा० स० )। स्त्री द्वारा मरण--(१) मीन लग्न में पाप युक्त सूर्य चन्द्र हो और अष्टम में पाप ग्रह हो तो स्त्री के द्वारा मरण हो (जा० पारि० )। स्त्री सहित जातक की मृत्यु-ळग्नेश, सप्तमेश, अष्टमेश एक साथ हो तो स्त्री सहित जातक की मृत्यु हो या लग्नेश, सप्तमेश, अष्टमेश का जिस किसी राशि में मरण कर्ता योग हो तो स्त्री सहित मरण हो । (जा०्सं०)। पुत्र सहित मरण--छूग्नेश, पंचमेश, अष्टमेश के स्वामी का जिस किसी राशि में मरण कर्ता योग हो तो पुत्र सहित मरण हो ( जा० भ०) | शरीर में कीड़ा पड़ने या घाव से मृत्यु--(१) शनि दूसरा, चन्द्र चौथा, मंगल दशम हो ( वृ० जा० )1 है र