भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

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पृष्ठ 283

मारक स्थान : २७३

सवारी से मृत्यु--१-दशम में सूर्य, चतुर्थ में मंगल हो तो सवारी से म,त्यु हो

[ वृ० जा० ] । २-चतुर्थेश छठे स्थान में शनि युक्त [ ज० सं० ]। ३-दशम सूर्य,

चतुर्थ मंगल, चन्द्रमा द्वितीय हो तो हाथी घोड़ा आदि सवारी से गिर कर मरे [जा०

पा०] ४, ६, ८ घर के स्वामी चतुर्थेश के साथ हों तो वाहन से मत्यु हो [ स०

चि०] । वाहन में पालकी, मोटर, साइकिल, हाथी, घोड़े आदि सब प्रकार की सवारी

शामिल है । ५-मंगल चन्द्र सूर्य के साथ दशम में हो तो परदेश में या वाहन आदि से

मृत्यु हो [ जा० भ० ] । यन्त्र, गाड़ी रेल आदि से मरण--मँगल सप्तम व शनि चन्द्र सूर्ग लग्न में हो तो

यन्त्र से, गाड़ी से, रेलसे इजिनया दो गाडी की संधि में पड़कर म.त्यु हो

[ प्रा० यो० ]।

यन्त्र की पीड़ा से मरण-१-प्रप्तम में मंगल दशम में बुध हो या सप्तमेश चतुर्थ

भाव में हो तो यन्त्र की पीड़ा से मरण हो [ जा० सं० ]। २-सप्तम में मंगल, और

लग्न में शनि सूर्य चंद्र हो तो यन्त्र से मिल जाने से मरण जेसे इ जिन कोल्हू आदि

यन्त्र से हो [ वु> जा० ] । ३-क्षोण चंद्रमा शनि सूर्य लग्न में हो और मंगल सप्तम

हो तो यन्त्र सं दव कर मरे [ जा० भ० ]।

ब्रण व अग्नि से मृत्यु--लग्न में शनि, पष्ठ में सूर्य, सप्तम में बुध, दशम में

चन्द्र हो और नवम में मंगल हो तो ब्रण या अग्नि से मृत्यु हो [ जा० सं० ]।

घर गिरने से--अष्टमेश चतुर्थ हो तो घर गिरने से मृत्यु हो [ ज्यो० रह० ]।

स्वाभाविक मृत्यु--अप्टमेश अष्टम हो तो स्वाभाविक मृत्यु हो [जा० सं०]।

घाव [व्रण] आदि से म.त्यू---१-शनि धन भाव में हो, चन्द्रमा चतुर्थ में हो

और मंगल दशम में हो तो व्रण [घाव] आदि से म.त्य, [ जा० पा० ] ।

नरक या तप्त तेल में पड़कर मरे--मंगल सप्तम, श.न मेष का, चन्द्र मकर या

कुंभ का हो तो नरक में पड़कर मरे या तप्त तेल में पड़कर मरे (प्रा यो०) ।

पागल पन या पिशाच पीड़ा से मृत्यु--क्षीण चन्द्र राहु मंगल या शनि युक्‍त

होकर त्रिक स्थान में हो तो पागल पन या पिशाच पीड़ा से मृत्यु हो [स०चि०] ।

हाथ कटने से मृत्यू-- -नवम में शनि, तीसरे में गुरु हो तो जातक के हाथ पैर

काटे जावें [ जा० पा० ] । २-5 वें शनिओर १२वें गुरुहो तो भी वही फल

है [ जा० पा० ]। ३- राहु शनि और बुध दशम भाव में हो तो होथ से रहित हो

[जार पारि० ]।

हाथ पैर कटने से मृत्यु--१-अष्टम में अत्यन्त क्षीण चंद्र, दशम में मंगल, लग्न

में शनि व चतुर्थ में सूय हो तो हाथ पेर कटने से मृत्यु हो [ प्रा० यो० ]। ३- शनि

लग्न में, राहु सप्तम, और शुक्र कन्या में हो [जा० पारि०] ।

पंगु होकर मृत्यु--शनि चन्द्र कर्क में हो शुभ दृष्ट न हों तो पंगु होकर मरे ।

सिर कटने से मृत्यु--१- पष्ठेश शुक्र के साथ ओर शनि या सूर्य राहु के साथ

पाप नवांश में हों तो सिर कटने से मृत्यु हो ।२- राहु ककं में, चन्द्र सिह में हो या

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