सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 282, कुल 454 में से
संदर्भ में पढ़ें२७२ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड
कुल नाशक, अग्नि से मृत्यु ३-लग्नेश पाप युक्त केन्द्र में हो या व्यय में हो या
अष्टम भाव में हो तो दुष्ट स्वभाव चरित्र वाला कुल नाश कर्ता हो, अग्नि में जल
कर मरे ( स० चि० )।
हाथी या सिह से मरण--१-सूर्य से युक्त चंद्र ६, ८ घर में हो तो वह हाथी
दोष से या सिंह निमित्त से मरण हो ( मान० ) ।
हाथी से मरण--चतुर्थ में सुर्य ओर मंगल और दशम में शनि हो तो गज से निसंदेह मृत्यु हो ( जा० सं० )।
सिह या राजा से मरण--ससूर्य युक्त चंद्र ६ या ८ घर में हो तो उसकी मृत्यु राजा
या सिंह से हो ( छ० चं० )।
सिह मृग सर्प से या कुआँ में या घर गिरने से--अष्टमेश जलराशि ( ४, ७, ८,
१०, ११, १२, राशि ) में होकर ४, ६ या १२ भाव में हो तो सिंह मृग सपं से या
कूप में यां घर गिरने आदि से मरण हो ( जा० स० ) ।
बाघ सर्प, शस्त्र या अग्नि से मृत्यु--अष्टमेश पापग्रह हो और पाप ग्रह से युक्त
या दृष्ट हो तो शस्त्र अग्नि, सपं या व्याघ्र से मृत्यु हो ( फल० ) ।
सपं द्वारा म.त्यु--१-वृष का या तुला का सूर्य नवम हो और चंद्र युक्त या दृष्ट
हो । २-राहु अष्टम भाव में पाप दृष्ट हो ( जा० पारि० ) । ३-पंचमेश पंचम में
राहु युक्त हो और शुभ दृष्ट न हो ( स० चि० )। राहु सपं बताता है इसमे शुभ
योग या दृष्टि होने से इस भय को दूर करता है जैसे पंचमेश उच्च या अपने अंश का
हो। ४-शत्रु क्षेत्री या भीम क्षेत्री चंद्र ६या ८ घर में हो ( जा० सं० )। ५-शत्रु
गृही सूर्य नवम भाव में चंद्र से युक्त या दृष्ट हो तो सर्प से मरण हो ( जा० सं० ) ।
घोड़े से म.त्यु--दशम मंगल और गुरु हो सप्तम में सूर्य हो तो घोड़े से मत्यु
हो [ जा० सं० ]।
पक्षी से व घोड़े की लात से मत्यु--सप्तम में मंगल, सूर्यं हो । शनि अष्टम,
चंद्र चतुर्थ हो तो वह पक्षी या घोड़े की लात से मरे [ जा० भ० ]।
पक्षी द्वारा म॒त्यु--१-सप्तम में सूर्य मंगल युक्त हो, शनि अष्टम में हो, चतुर्थ
में क्षीण चंद्र हो तो पक्षी द्वारा मरण हो [ जा० सं० ] [ वृ० जा० ]। २-प्रप्तम में
सूर्य मंगल शनि युक्त व अष्टम में क्षीण चंद्र हो [ प्रा० यो० ]।
पशु से मत्यु--१-कर्क या सिंह का चन्द्र ७ या ८ भाव में राहु युक्त हो तो पश्
से मरण हो [ जा० सं० ]।
जल जीवों से मरण--१-चन्द्र ६ या ८ घर में हो, शत्रु क्षेत्री बुध पर सूर्य की
दृष्टि हो या सूर्य युक्त हो तो जल जीवों से मरण हो [ .जा० सं० ]।
गाय बेल के सींग से या गुल से मरण-- १-सूर्य दशम हो, मंगल चतुर्थ हो शुभ
ग्रह से युक्त न हो वुध लग्न में हो तो गाय बैल के सींग से या शूल से मरण हो
| जा० पारि० ]1