सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 281, कुल 454 में से
संदर्भ में पढ़ेंमारक स्थान : २७१
शनि गुलिक राहु से युक्त होकर ६,८,१२ भाव में हो लग्नेश से दृष्ट हो तो अपमृत्यु हो ( जा० पा० )।
युद्ध में मरण--१-षष्ठेश अष्टमेश या मंगल तृतीयेश से युक्त होकर शनि मांदि और राहु से भी युक्त हों, क्रूरांश में हों तो युद्ध में मरे ( स० चि० )। २-शनि का द्रेष्काण मंगळ के घर या अंश में हो और मंगल की दृष्टि हो (स० चि०) ।
युद्ध में या शस्त्र से मरण--३-अष्टम और लग्न के स्वामी बळहीन हों मंगल षष्ठेश युक्त हो तो युद्ध में मरण हो विशेषकर शस्त्र से मरण हो (जा० पा०) । ४- अष्टमेश व लग्नेश दोनों बलहीन होकर ६ या ८ घर में हो तो युद्ध में मरण हो (जा० छं०) । ५-छग्नेश अष्टमेश पाप गूह युक्त बल सहित षष्ठ घर में हों । जब ये गूह् अब्ठम में बडहीन हों और केवळ षष्ठ मों शक्तिहीन रीति से हों तो खतरा होगा पर बच जायगा (स० चि०) । ६-अष्टमेश ओर लग्नेश बळ रहित हों तथा मंगल और षष्डेश से युक्त हों तो रण में मरण विशेषतः शस्त्र से (स० चि०)।
ढ़ युद्ध में मरण--१-द्वितीय स्थान में निर्बल शुभ गृह हो (जा० पा०)। र-सूर्य मंगल की परस्पर दृष्टि हो और एक दूसरे के घर में हों या एक दूसरे के नवांश में हों ( स० चि० ) ।
यहाँ एक दूसरे के घर में होने सें परस्पर दृष्टि नहीं हो सकती परस्पर दृष्टि लग्न में मेष का सूर्य सप्तम में शनि होने से होती है।
युद्ध भय या स्फोटित ( माता ) का भय-लग्नेश और षष्ठेश मंगल के साथ हों तो लड़ाई का भय या स्फोटित (माता-चेचक) का भय हो जिससे मृत्यु हो (स० चि०)। शस्त्र या अग्नि से मृत्यु--१-पाप ग्रहों की राशि में चंद्र होकर पाप ग्रहों के सध्य में हो तो अग्नि या शस्त्र से मरण हो ( जा० सं० ) ।
२-चंद्र मेष या वृश्चिक राशि में हो । चंद्र से बारहवें स्थान में पाप ग्रह हो तो शस्त्र या अग्नि से मृत्यु ( प्रा० यो० ) ३-मंगल के गृह में चंद्र पाप ग्रहों के बीच हो ( वृ० जा० )। ४-चंद्र १, ८ राशि में या १०, ११ राशि में हो। ४-चंद्रमा ` मंगल या शनि के घर में पाप दृष्ट हो या पाप ग्रह के बीच कन्या राशि में या चतुर्थ भाव में हो तो शस्त्र या अग्नि से मृत्यु हो ( जा० पारि० ) ।
शस्त्र अग्नि व गिरने से मृत्यु--१-शनि की राशि में चंद्र पाप ग्रह के नवांश में हो तो अग्नि शस्त्र ओर ऊँचे से गिरने से मृत्यु हो ( जा० सं० )। २-सुर््य ग्रहण का जन्म हो ळग में सूर्य अष्टम में मंगल हो तो शस्त्र से या गिरने से मृत्यु हो
(स० चि० )।
शस्त्र से मृत्यु १-चतुर्थंश छठे स्थान केन्द्र युक्त हो ( जा० स॑० )। २-रूगन या
अष्टम में सूर्य हो ( प्रा० यो० ) । ३-छग्न या अष्टम में मंगल हो ( प्रा यो० ) । अग्नि में गिर कर मरे १-चंद्र मकर या कुम्भ राशि में पापग्रहों के बीच हो ( प्रा० यो० ) । २-नवमेश नवम में, सूर्य मंगल भी नवम में हो ( जा० भ० )।