भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

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२७० : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड

गळा घुटकर मरे--१-अष्टम स्थान मे गुरु नीच का हो तो गला घुटकर मरे

( स० चि० ) | २-अष्टमेश निर्बल हो, लग्न मे पाप ग्रह की दृष्टि हो तो गले मे

भोजन रुकने के रोग से मृत्यु हो ( जा० पा० ) ।

आत्महत्या--१-४, ५, ९, १० भाव मे पाप ग्रह हो, लग्न मे अष्टमेश मङ्गल

के साथ हो तो आत्महत्या से मृत्यु हो । २-जन्म लग्नेश पाप ग्रह हो या पाप ग्रह के

बीच हो और लग्न से सप्तम घर मे पाप ग्रह हो तो आत्मघात से मरे ( मान० )1

३-क्रूर लग्न मे जन्म हो, लग्नेश क्रूर हो तो शरीर कष्ट से आत्मघात करे (मान०) ।

अपघात--१-सूर्य या चंद्र मङ्गल की राशि मे हो शनि से पीड़ित हो ।

या सूर्य या चन्द्र शनि की राशि मे' हो मङ्गल से पीड़ित हो ।

या शनि मङ्गल केन्द्र से अशुभ दृष्टि करते हों तो अपघात होने का भय रहे

( दा० यो० ) । २-जिसकी कुंडली मे लग्न या सूर्य चन्द्र पाप ग्रहों से पीड़ित हों, पाप

ग्रह केन्द्र मे या बलवान्‌ हों और सूर्य चन्द्र या लग्न का शुभ ग्रहों से सम्बन्ध न हो

उसे अपघात का भय रहता है ऐसी कुंडली मे जिस प्रमाण से अशुभ योग हों उसी

प्रमाण से आकस्मिक रीति से मृत्यु होती है ।

पहिले अपघात कौन-सा होगा इसका विचार करना । अपघात उत्पन्न करने वाला

मुख्य ग्रह मङ्गल है ।

जिसके लग्न मे १, ५, ४, ९, १० राशि के चंद्र के अति पास मंगळ हो किंवा

चंद्रमा इनमे' से किसी राशि से ४, ६, ८ घर मै मंगल युक्त हो, या उपरोक्त राशि

१, ४, ६, ८, १० घर मे कहीं अकेला मंगळ हो । उसे पाप ग्रह की अनिष्ट स्थिति

प्राप्त होकर मंगल उपरोक्त स्थान मे आवे तब अपघात होने का भय होगा।

३-कोन ग्रह किस प्रकार अपघात करते हैं :--+

मंगल --विस्फोट होना, कंपन, लंगडाना, घाव होना, मोच हो जाना आदि से ।

शनि--गिरना, चिपट जाना, अंग पर जड़ पदार्थ गिरना, मादि से ।

अचानक मृत्यु--१-अष्टम स्थान मे बहुत पाप ग्रह मंगल की राशि या नवांश

में हों क्रूर षष्ठ्यंश में हों तो तत्काल मरण हो (अकस्मात्‌ मृत्यु) । २-समस्त शुभ

ग्रह नीच अस्त अत्रु गृही या युद्ध में पराजित तथा पापांशको में पाप ग्रहों से युक्त हों ।

३-शनि राहु सूर्य अष्टमेश से दृष्ट हों सभी क्र्रांशकों में अस्तगंत हों तो अकस्मात्‌

मृत्यु हो ( स० चि० ) । ४-चंद्र दुष्ट स्थान में, शनि मांदि और राहु युक्त हो और

लग्नेश की दृष्टि हो तो अकस्मात्‌ मृत्यु हो ( स० चि० ) ।

अचानक मृत्यु--५-षष्ठ स्थान में राहु व चंद्र हो तो अकस्मात्‌ मरण हो

( प्रा० यो० ) । ६-षष्ठ स्थान में मंगल का सम्बन्ध किसी प्रकार हो तो आकस्मिक

घटना या चीर फाड़ (आपरेशन) से शरीर कष्ट हो । ७-चतुर्थ में शनि और दशम

में मंगल हो तो उसकी अपमृत्यु हो संदेह नहीं ( जा० सं० ) 1 न

अप मृत्यु--१-शत्रु स्थान में चन्द्र, बुध, या गुरु होवे (शंभु०) । २-चंद्रमा यदि

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