भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

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मारक स्थानः २७७

यदि पाप ग्रह से युत या दुष्ट हो तो--वहुत कष्ट से । शुभ ग्रह से युत या दुष्ट हो तो--अल्प कष्ट से ।

यदि शुभ और पाप दोनों से युत दृष्ट हो तो--मध्यम कष्ट से [जमिनि] । अष्टम भाव में भिन्न ग्रह होने से मृत्यु का कारण लग्न से अष्टम में सूयं--अग्नि से मृत्यु [वृ० पा०] । सूर्यं बली पाप ग्रह युक्त या

दृष्ट हो तो उसे यमदूत होकर नाश करता है [जा० सं०]। सूर्य-अन्तर्दाह या अग्नि

से, मृत्यु । स्वक्षेत्र या उच्च का सोख्य देता है अन्य राशि का दुःख देता है । शत्रु क्षेत्री

हो तो सपं काटने से मरे । शुभ राशि का हो तो-तीर्थ में मरे [प्रा० यो०]।

लग्न से अष्टम में चन्द्र--जल से [ वृ० पा० ]।

fT 1) चन्द्र--मरण करता है । क्षीण चन्द्र चाल अवस्था में मृत्य,

त्रिदोष ज्वर करता है [जा० सं०]। जल से। पाप ग्रह

की राशि हो तो श्वास त्रिदोष ज्वर सूजन से मृत्य,

हो [प्रा० यो०] ।

» र) मंगल--शस्त्र से [वृ०पा०] । शस्त्र, अग्नि, कुष्ठ व शस्त्र क्रिया

से स्त्री को पीड़ा [जा० सं०] [प्रा० यो०] 1

रूग्न से अष्टम में बुध--ज्वर से ( वु० पा० ) सुख पूर्वक निर्मल तीर्थ में मृत्यु ।

जंघा और पेट में शूल रोग की पीड़ा । पाप युक्त बुध-मृत्यु

करता है ( जा० सं० )। ज्वर, ताप शूल होकर तीर्थ में

मरण ( प्रा» यो० ) 1

गलत कर गुरु--ज्वर से। शुभ राशि का, स्वगृही-ज्ञान से सुन्दर तीथं में

मरण । अन्य राशि का श्रम से मरण [ जा० सं० ]। रोग

का ज्ञान नहीं होता पर चैतन्य होकर मरता है [प्रा० यो०] ।

न” ठ शुक्र--क्षुधा से [ वू० ण० ] । पाप से व्याकुल होकर तीर्थ में मरे

[ प्रा० यो० ] । पिता के कुल को पवित्र करता है तीर्थ में

मरता है [ जा० सं० ]।

#० म शनि--पाप से [ वु? पा० ]। विदेश में या नीच के समीप मृत्यु ।

हृदय रोग, खांसी, विसूचिका आदि नाना प्रकार के रोग से

[ जा० सं० ] । भूख लगकर परदेश में मरे अपने कुल व

मामा के कुछ का नाश करे क्षुधा तृषा से पीड़ित होकर या

शत्रु से, विष खाकर, सपं डसकर या अग्नि में जलकर मरे।

शनि कूर ग्रह युक्त हो तो चोर से मरे [ प्रा० यो० ]।

क १, राहु-दुष्ट चोरी की निंदा से मरण, कष्ट यातना से मरण [जा.सं.]।

४ राहु केतु--नाना प्रकार की वेदना से मरे [ प्रा यो० ] 1

अष्टम में अधिक ग्रह हों तो उनमें जो बली हो उसके योग से मरण ।

अष्टम में शुभ ग्रह--तीर्थ में मरण [वृ० पा०]। शुभ कमं से मरण [प्रा०्यो०]।