सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 288, कुल 454 में से
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२७८ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड
0 » पाप ग्रह- अन्यत्र मरण [वृ० पा०]। बड़े कष्ट से मरे [प्रा यो०]।
क़ „ ग्रह बलवान् हो--शुभ कमं के हेतु मरण ।
ह ०४ निर्वेल---अशुभ कमं हेतु मरण ।
अष्टम भाव को जो बलवान् ग्रह देखता हो उसके धातु दोष से मरण ।
सूर्य देखे तो - अग्नि से गुरु देखे तो - कफ से
चन्द्र , “जलसे शुक्र देखे तो - क्षुधा से
मंगल , - शस्त्र से शनि देखे तो - तृषा से रोगोत्पन्न होने से
बुध , -ज्वरसे
यदि अष्टम भाव को कोई बली ग्रह न देखता हो और अष्टम में कोई ग्रह न हो
तो आठवें भाव में जो द्रेष्काण हो उसके स्वामी के धातु से मरण हो [जा० पारि०]।
गुलिक से मरण विचार
मरण समय जिस राशि में गुिक हो उससे सातवें राशि में यदि
बलवान् ग्रह हों - सुख से मृत्यु मंगल हो -- समर में मृत्यु
शनि „ -- चोर, सपं या दानव से
सूये ,, -- राजदण्ड से
क्षीण चन्द्र “- जल रे मृत्यु [जा० पारि]। ग्रहों की १२ प्रकार की स्थिति के अनुसार यवनाचायं मत से अष्टम में ग्रहों से मरण विचार--
१. अष्टम सूयं का फल
१-स्वोच्च-भक्ति पुर्वक अग्नि में प्रवेश से मरण । २-उच्च नवांश में-जन लज्जा
से। ३-शुभ वर्ग में-प्रमाद से । ४-नीच राशि में-दावारिन से । ५-नीच नवांश-दंभ
से। ६-क्रूर षड वगं-जळने से | ७-मिंत्र राशि-विष भोजन से। ८-मित्र नवांश-बंधन
से । ९-वर्गोत्तम-लोहे से। १०-शत्रुराशि-रक्त प्रकोप से। ११-शत्रु नवांश-क्षय
कास रोग से । १२-स्वराशि में-आतप [धूप] से मरण ।
२. अष्टम चन्द्र का फल
१-स्वोच्च में-जल प्रवेश से । २-उच्च नवांश में-हाथ के प्रहार से । ३-शुभ
षड्वगं-तलवार के प्रहार से । ४-नीच राशि में-स्त्री के हाथ से ४-नीच नवांश में-
पित्त कफ से। ६-क्रूर षड्वगं में-सन्निपात से उत्पन्न रोग से । ७-मित्र राशि-पेट
के रोग से । ८-मित्र नवांश-गुदा रोग से। ९-वर्गोत्तम में-पशुओं के प्रहार से। १०-
शत्रु राशि में-गुप्त रोग से। ११-शत्रु नवांश में-श्रुग प्रहार से । १२-स्वराशि में-
क्षय रोग से। ३. अष्टम में मंगल का फल
१-स्वोच्च-संग्राम से । २-उच्च नवांश-गौ के ग्रहण से। ३-शुभ वर्ग-अपने हाथ
से। ४-नीच राशि-अपने शत्रु से । ५-नीच नवांश-ग्राह्मण के पाश्वं से। ६-क्रूर