सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 289, कुल 454 में से
संदर्भ में पढ़ेंमारक स्थान : २७९
षड्वर्ग-पत्थर के प्रहार से । ७-मित्र राशि-कष्ट प्रहार से । ८-मित्र नवांश-कूप में
गिरने से । ९-वर्गोत्तम-भीत के गिरने से । १०-शत्रु राशि-गुप्त रोग से । ११-शत्रु
नवांश-विष भक्षण से । १२-स्वराशि में-चोर के प्रहार से मरण ।
४. अष्टम में बुध का फल
१-स्वोच्च-ज्वर प्रकोप ॥ २-उच्च नवांश-कफ विकार । ३-शुभ षड्वगं-वातरोग
से । ४-नीच राशि-ब्रण से। ५-नीच नवांश-महारोग से । ६-क्रूर षड्वगं-प्रियजन
के वियोग से। ७-मित्र राशि में-मुख रोग से । ८-मित्र नवांश में-नेत्र रोग से । ९-
वर्गोत्तम-वात रोग से । १०-शत्रु राशि-वन्धन से। ११-शन्रु नवांश-पेट के रोग
से। १२-स्वराशि-पांव के घाव से ।
५ अष्टम में गुरु का फल १-स्वोच्च में-अनेक शूळ रोग से । २-उच्च नवांश-शूल रोग से । ३-शुभ षड्-
वर्ग में-कर्ण रोग से । ४-नीच राशि में-स्वजन से ५--नीच नवांश-विशूचिका से।
६-कूर षड्वर्ग-अतिसार से । ७-मित्र राशि-अपने पुरुष के मरने से। ८-मित्र
नवांश-रक्त दोष से । ९-वर्गोत्तम-घोड़े से । १०-शत्रु राशि-अपने स्वामी से । ११-
शत्रु नवांश-राज कोप से । १२-स्वराशि-वहु भक्षण.करने से ।
६ अष्टम में शुक्र का फल
१-स्वोच्च में-तुष्णा से । २-उच्च नवांश-मुख रोग से । ३-शुभ षड्वगं-दन्त रोग
से । ४-नीच राशि-त्रिदोष सन्निपात से । ५-नीच नवांश-विशुचिका से । ६-क्रूर
षड्वगं में-वनचारी जीव से । ७-मित्र राशि में-सपे से । ८-मित्र नवांश में-विषभक्षण
से । ९-वर्गोत्तम-लूता ( मकड़ी फनक जाने ) से । १०-शत्रु राशि-विष कण्ठ से |
११-शत्रु नवांश-रति भोग प्रकोप से । १२-स्वराशि-बहुत दुख से । ७-अष्टम शनि का फल
१-स्वोच्च में-भूख से । २-उच्च नवांश-लंघन से । ३-शु भ षड्वगं-अन्न त्यगने
से। ४-नीच राशि-बन्धु वाग से। ५-नीच नवांश-शत्रु के हाथ से। ६-क्रूर
षड्वगं-क्षयरोग से। ७-मित्र राशि में-महादब्रु रोग से ८-मित्र नवांश में-चातक
पक्षियों द्वारा । ९-वर्गोत्तम-ब्नण के प्रकोप से। १०-शत्रु राशि-घोड़े के पर की
चोट से । ११-शत्रु नवांश-हाथी से । १२-स्वराशि-गधघे से ।
अष्टम भाव या अध्मेश की राशि या नवांश द्वारा मरण निमित्त का ज्ञान
अष्टम में या अष्टमेश की राशि या नवांश का फल
१--मेष राशि या नवांश--ज्वर विष, पेट की अग्नि से व पित्त प्रकोप से मरण
जिस ग्रह से युक्त या दृष्ट हो उस ग्रह की धातु दोष से मरण ।
२--वृष राशि या नवांश--त्रिदोष, शोक पर शस्त्र व दाह आदि से मरण । ग्रह
से हीन हो तो उपरोक्त फल! ग्रह युक्त हो तो उस ग्रह के समान दोष से मरण ।
३--मिथुन राशि या नवांश--श्वाश, कास व शूल आदि से मरण ।
४---कर्क राशि या नवांश--मंदाग्नि से व अरुचि से मरण ।