सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 290, कुल 454 में से
संदर्भ में पढ़ें२८० : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड
५--सिह राशि या नवांश--विस्फोट ( फोड़ा ) व शस्त्र प्रहार, व ज्वर आदि
से मरण ।
६--कन्या राशि या नवांश--जठराग्नि ब गुद्यरोग व कलह या पातक आदि
से मरण ।
७--तुला राशि या नवांश--जुद्धि के दोष से व ज्वर या सन्निपात दोष से मृत्यु ।
८-र्वृश्चिक राशि या नवांश-पांडु "रोग, संग्रहणी रोग व ग्रह आदि दोष से मृत्यू ।
९--घनु राशि या नवांश--वृक्ष जल शस्त्र काष्ठ किसी से मृत्यु ।
१०-मकर राशि या नर्वांश--स्थूलान्न की अरुचि से व बुद्धि भ्रांति से मरण ।
यदि पाप युक्त हो तो व्याघ्र व सर्प आदि जीवों से मृत्यु ।
११-कुम्भ राशि या नवांश--व्याप्र से व शस्त्र व सपं आदि से,श्वास, ज्वर, क्षय,
से मृत्यु ।
१२--मीन राशि या नवांश--मार्ग में प्राप्त हुआ पुरुष, सपं आदि से या जल मध्य
में जल जीवों से व मेघ प्रकोप से पीड़ित होकर मरण ( जा० सं ) ।
लग्नेश जिस नवाँश में हो उस राशि के कोप से मृत्यु
१ मेष राशि के नवांश में--ताप ज्वर या अग्नि से।
२--वृष राशि के नवांश में-विकार या शूल रोग से ।
३--मिथुन राशि के नवांश में--सिर की पीड़ा से ।
४--कक राशि के नवांश में-वात और उन्माद से । रु
५--सिंह राशि के नवांश में--विस्फोट से । डे
६--कन्या राशि के नवांश में--जठराग्नि से 1
७--तुला राशि के नवांश में--शोक से, चतुष्पाद या ज्वर से ।
८--वृश्चिक राशि के नवांश में --पत्थर और शस्त्रादि से ।
९--घनु राशि के नवांश में--वायु से ।
१०--मकर राशि के नवांश में--व्याप्नादि से ।
११-छुभ राशि के नवांश में--व्याध्र या स्त्री से! १२-मीन राशि के नवांश में-ज्वर से, अतिसार से ( जा० पा० )। लग्न से २२ द्रेष्काण जो हो उसका स्वामी व अष्टम भावेश अपने गुणों से मरण सूचित करता है ।
अष्टम में कोई ग्रह न हो या किसी की दृष्टि न हो तो नीचे बताये अनुसार द्रेष्काण का फल बिचारना । लग्न से २२ द्रेष्काण के स्वामी के हेतु मरण कहा गया है। [१] मेष १ द्रेष्काण--शुभ ग्रह उसे न देखते हों) ताप तिल्ली रोग, विष या पाप ग्रह देखते हों | पित्त रोग से व बिच्छ सपं आदि से भरण॥ | » २ द्रेष्काण--जल जीवों से जल से व बन के वीच मृत्यु । » २ द्रेष्काण- छुँआ तालाब बावली आदि में गिरने से ।