सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 292, कुल 454 में से
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२५२ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड
[११] कुम्भ १ द्रे०--स्त्री से,पुत्र से उदर व्याधि से, जळचारी जीव, स्त्री विष से
मरण हो ।
/ २ द्रे०--गुद्यरोग विष व पवत से गिरने से, गुदा के रोग से ।
रै द्रे०--मुख रोग या चोपाये से ।
[१२] मीन १ द्रे०-ंग्रहणी, प्रमेह, गुल्म रोग व स्त्री से।
, २ द्रे०--जलोदर आदि रोग से, हाथी से या ग्रह से, जल में स्नान
आदि करने से ।
„ दै द्वे०--बुरे लोगों से, जल से या अश रोग से या मूत्रकृच्छु से
मरण हो 1 मरण स्थान का योग
द्वारिका में १--अष्टमेश नवम में हो गुरु शुक्र बुध या चन्द्र इनमें से किसी से
दृष्ट हो तो उस शुद्ध बुद्धि वाले का मरण द्वरिका में हो । २--अष्टमेश व अष्टम
भाव का द्रेष्काण पति होकर बुध शुक्र नवम भाव में हो तो द्वारिका तीर्थ में मरण हो ।
प्रयाग में १--अष्टमेश व अष्टम भाव का द्रेष्काण पति होकर चन्द्र नवम भाव
में हो तो प्रयाग में मरण हो ।
काशी में १--अष्टमेश व अष्टम भाव का द्रेष्काण पति होकर चन्द्र नवम भाव
में हो तो काशी में मरण हो । २--नवमेश शुक्र होकर अष्टम में हो तो काशी में
मरण हो । ३--नवमेश शुभ ग्रह होकर अष्टम में हो और शुभ ग्रह युक्त या दुष्ट हो
तो काशी में मरण हो ।
` तीर्थं में १--अष्टमेश शुभ ग्रह हो ओर अष्टम भाव शुभ ग्रह से दृष्ट हो तो तीर्थ में मरण हो । २--नवमेश नवम में हो और शुभ ग्रहों सें दृष्ट हो तो तीर्थ «में मरण
हो । ३--नवमेश नवम को देखें और लग्नेश लग्न और अष्टमेश अष्टम को देखे तो
शुभतीथं में मरण हो । ४--अष्टमेश अपनी राशि में हो या लग्नेश के साथ या गुरु या
शुक्र के साथ हो तो अच्छे तीर्थ में मरण हो । ५--अष्टमभाव शुभ ग्रह से युक्त और दृष्ट हो या अष्टमेश से युक्त हो तो अच्छे तीथं में मरण हो । ६--अष्टम भाव शुभ ग्रह युक्त या दृष्ट हो और नवमेश शुभ ग्रह हो । ७--अष्टमेश शुभ ग्रह होकर केन्द्र में हो तो तीर्थं जावे वहाँ हरि-कीर्तन में मुक्ति होवे ।
गंगाजळ के समीप- जन्म राशि से वजित होकर ३ ग्रह एक राशि में हों तो हजा
पापों को त्याग कर गंगा जल के समीप मरण हो ।
शिवालय में--बुध व्ययभाव में हो तो शिवालय में मृत्यु हो । श्रेष्ठ भूमि मंदिर या वाटिका में-द्वादश भाव में सूर्यं मंगल दोनों हों ओर सप्तम
में राहु चंद्रमा हों, गुर केन्द्र में हो तो श्रेष्ठ भूमि व देव मंदिर या वाटिका में
मरण हो ।
शुम स्थान- तृतीय स्थान में शुभ ग्रह का योग दष्टि हो तो शभ स्थान तीर्थ आदि में मरण हो ।