सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 293, कुल 454 में से
संदर्भ में पढ़ेंमारक स्थान : २८३
मगध
अशुभ स्थान-- तृतीय स्थान में पाप ग्रहों का योग या दृष्टि हो तो अशुभ स्थान आदि में मरण हो । मध्य स्थान प
की योग या स्वगृह में--तृतीय स्थान में शुभ ओर पाप दोनों प्रकार के ग्रहों दृष्टि हो तो मध्य स्थान अर्थात् अपने ही घर में मृत्यु हो । .
शनि
विष्ठा के मध्य--दशम में क्षीण चंद्र और मंगल की राशि में सूर्य हो चंद्रमा की राशि में हो तो विष्ठा के मध्य मरण हो ।
घर में
शुभ विधि से अपने घर में--नवमेश गुरु होकर अष्टम में हो तो शुभ विधि से
अपनी
मरण हो, अष्टमेश व अष्टम भाव द्रेष्काण पति गुरु होकर नवम में हो तो भूमि में मरण हो । परदेश में मरण--अष्टमेश व अष्टम भाव का द्रेष्काण पति मंगल होकर नवम में हो तो परदेश में मरण हो
` तो कुंआं
जल के समीप मरण--चतुर्थेश लग्नेश के साथ चतुर्थ में हो दशमेश से दृष्ट हो आदि जलाशय के समीप मृत्यु हो । मरण भूमि ज्ञान
भूमि
` जन्म लग्न में जो नवांश हो उसका स्वामो जिस राशि में हो उस राशि की जो हो उस भूमि में मरण होगा । जैसे :--१-मेष-बकरी र-वृष-गाय या भेड़ों का स्थान । बैल आदि ढोरों का स्थान | ३-मिथुन-घर का स्थांन । ४-ककं- कूप आदि के समीप । ५-सिह-वन का स्थान । ६-कन्या-कुंआ के समीप । ७-तुला- बाजार
१०-मकर-जळ
या दुकान के समीप । ८-वृश्चिक-छिद्र की जगह । ९-धनु-घोड़े का स्थान । के समीप । ११-कुंभ-घर का स्थान । १२-मीन-जळ के समीप । १--जिन मरने के योगों में जलादि से मरना कहा है उनको मृत्यु जलादि में ही होगी । उनका यहाँ बताये राशि वश से मरण भूमि नहीं कहना । २- ग्रह लग्न नवांश पति की और लग्न नवांशेश जिसके नवांश में हो उसकी जो भूमि कही है उससे मृत्यु जानना । जहाँ बहुत प्रकार से भूमि का होना प्रगट हो वहाँ उनमें बलीग्रह से मरण भूमि का निर्णय करना ।
हो
३--लग्न नवांशेश जिस राशि में हो वहाँ ओर किसी ग्रह का साथ नवांशेश से उस योग करने वाले ग्र ह की योनि भेद में जो भूमि बताई गई है उस भूमि में मृत्यु हो । ४--जिस ग्रह की दो राशियाँ हों तो उसकी जो मूल त्रिकोण राशि हो, उसे लेना ओर उसके अनुसार भूमि कहना जैसे :-- सूर्य का मूल त्रिकोण--सिह राशि है जिसकी भूमि-वन है । चंद्र का मूल त्रिकोण कर्क राशि है जिसकी भूमि-जल समीप है । मंगल का मुळ त्रिकोण--मेष है भूमि-भेड़ बकरी का स्थान । बुध का मुल त्रिकोण--कन्या भूमि-कूप या जल समीप । ' उुरु का मूल त्रिकोण धनु, भूमि-घोड़े का स्थान ।