भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

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२८४ : संचित्र ज्योतिष शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड

शुक्र का मूल त्रिकोण--तुला, भूमि-दुकान आदि का स्थान ।

शनि का मूल त्रिकोण--कुंभ,,भूमि-घर का स्थान ।

अन्यमत से ऐसी परिस्थिति में ग्रहों की जो भूमि गुणधर्म में कही है वह लेना

अर्थात्‌ मंगल-अरिन स्थान । चुध-बिहार । गुरु-भंडार स्थान । शुक्र-शयन स्थान ।

शनि-ऊषर भूमि ।

५--अष्टम भाव का नवांश ( लग्न से ६४वाँ नवांश ) जिस राशि का हो उस

राशि से भी मरण की भूमि का विचार करना ।

मरण की दिशा

दिन के जन्म में रात्रि बली राशि या रात्रि के जन्म में दिन बली राशि लग्न में

हो तो लग्न गत नवांश पति, उसमें स्थित ग्रह, और उसके देखने वाले ग्रहों में जिसका

स्थान बल अधिक हो उसकी दिशा में जातक की मृत्यु हो ( जा० पारि० ) । मृत्यु के पश्चात्‌ शव संस्कार

अष्टम स्थान में जो तत्कालिक द्रेष्काण होता है वही लग्न से २०वाँ द्रेष्काण

होता है वह द्रेष्काण यदि :---अग्नि द्रेष्काण ( पाप द्रेष्काण ) हो--तो प्रेत का अग्नि

संस्कार ( दाह ) हो ।

जल द्रेष्काण ( शुभ द्रेष्काण ) हो-जल में बहाया जाय ।

मिश्र द्रेष्काण ( शभ और पाप दोनों ) हो कहीं ऊसर भूमि में सूखेगा ।

सपै द्रेष्काण हो तो--शरीर को कुत्ते, कोवे, चील, स्यार आदि खावें । वाद गति

न हो।

सपं द्रेष्काण--कर्क का पहिला, वृश्चिक का दूसरा, मीन का तीसरा (वु० जा०) ।

सपं द्रेष्काण भन्यमत से-कर्क का २, ३, वृश्चिक का १, २ मीन का १ (वृ. पा.) ।

यदि सौम्य द्रेष्काण हो तोमि-ट्टी में गड़ाया जावे । 1

यदि जलचर द्रेष्काण हो तो--जल में बहाया जावे ।

शव का दाह न हो--छग्नेश जल राशि के नवांश में होकर जल राशि में हो

ओर चन्द्र शुक्र से दृष्ट हो और पाप ग्रह ८,१२ घर में हो तो उस शव का दाह

संस्कार नहीं होगा ।

मरने के बाद दुर्गेति-द्वादश भाव शनि राहु या केतु से युक्त हो फिर अष्टमेश

से युक्त हो या षष्ठश से दुष्ट हो तो मरने के वाद दुर्गति हो ।

मृत्यु के पश्चात्‌ गति

१--जिसका ६, ७, ८ भाव ग्रह रहित हो तो तत्काल में जो ६ और ८ स्थान

में जिस का द्रेष्काण हो उसमें जो वली हो उसके अनुसार पूर्व बताई हुई प्रत्येक

पश्चात्‌ गति द्रेष्काण के अनुसार होगी। ६, ७, ८ भाव में कई ग्रह हों सभी जगह

ग्रह हों तो उनमें से जो बलवान्‌ हो उसके अनुसार गति मिलेगी । मोक्ष

१-जगुर कके का ६,८ या केन्द्र में हो ।