सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंमारक स्थान : २८%
२--मीन का गुरु लग्न में हो और शुभ ग्रह के अश में हो शेष ग्रह निर्बल हों ( वृ० जा० ) ।
३--१२ वें भाव मे शुभ ग्रह हो व्ययेश शुभ ग्रह से युक्त दृष्ट हो [वृ० पा०] 1 ४““गुद धनु लर्न में मेष के अंश में हो, शुक्र सप्तम हो और बली चंद्र कन्या राशि में हो [ जा० पारि ] ।
५-यय में केतु हो तो मुक्ति लाभ हो [ स० चितामणि 11 ६--दशम में मीन राशि का बुध या मंगल हो [ स० चि० ]। ७--दशम में मीन राशि हो शुभ ग्रह युक्त या मंगल युक्त हो { स० चि० ]1 ८--कहे हुए निर्वाण योग न हों उसके अष्टम भाव का द्रेष्काण पति बली होकर ६,७ या केन्द्र में हो तो मोक्ष हो [ जा० सं० ] ।
९--युरु स्वगृही ६-८ या केन्द्र में हो [ प्रा० यो० ] मोक्ष कहाँ होगा
मोक्ष द्रेष्काण पति यदि-:---
सूर्य हो--नमंदा नदी के पुर्व तट या शोण के या यमुना के दक्षिण तट में । _ चंद्र हो--शोण के उत्तर या अयोध्या, सरस्वती व वेत्रवती में मरण हो। मंगल हो--कृष्णा, गोदावरी, नमंदा तीथ, फल्गुतीर्थ या गंगा तट में । बुध हो--गंगा, कौशिकी, गंभीरा व वासिष्ठी नदी को प्राप्त होकर मरण । गुरु हो--सिधु, मथुरापुरी, विपाशा नदी को प्राप्त होकर मरण । उच्च का केन्द्री गुरु--काशी, ऐरावती, गंगा व रामपुरी को प्राप्त होकर मरण ? मोक्ष स्थान 2
मोक्षमार्गी पति उच्च का शुक्र हो- शततद्रु, चन्द्रभागा, इरावती, गंगा व देविका । मोक्षमार्गी पति उच्च का शनि हो--प्रभास क्षेत्र, कुरुक्षेत्र, बटेश्वर, सरस्वती व दृषद्वती में मरण [ जा० सं० ]।
मृत्यु के पश्चात् प्राणी किस लोक जायगा
१--छग्न से ६,७,८ स्थान में कहीं गुर हो तो--देव लोक को जायगा । लग्न से ६,७,८ स्थान में शुक्र चंद्र हो तो--चंद्र लोक [पितृ लोक] । लग्न से ६:७,८ स्थान में सूर्य मंगल हो तो--भूलोक या तियंग्योनि [कीटादि] । लग्न से ६,७,८ स्थान में बुध शनि हो तो--अधो लोक [नरक] ` जायगा ; २--६,७,८ भाव में कोई ग्रह न हो तो ६,८ भाव के द्रेष्काण पति में जो वलवान् हो उस ग्रह के लोक में जायगा ।
३--या मरण काल के लग्न में उपरोक्त ग्रह से लोक विचारना या उनमें बली
द्रेष्काण पति से लोक विचारना ।
४--इनमें भी ग्रह की उच्च नीच या मध्यम की स्थिति के अनुसार गति की श्रेणी
का विचार होता है । जंसे--