सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 296, कुल 454 में से
संदर्भ में पढ़ें२८६ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड
उक्तग्रह उच्च में हो या द्रेष्काणेश पर शुभ दृष्टि हो तो--देव लोक आदि में
श्रेष्ठ श्रेणी मिलेगी ।
उक्तग्रह नीच में हो--देवलोक आदि में नीच श्रेणी मिलेगी ।
नीच उच्च के मध्य में--देवलोक आदि में मध्यम श्रेणी मिलेगी [स० चि०]।
५ू---राशि चन्द्र के अनुसार ३ लोक का स्थान निर्णय---
१,२,३,४ ये ४ राशि भूचक्र है--ये मरण काल में हों तो--भूलोक जाता है।
५,६,७,८ ये राशि भुवश्चक्र है--ये मरण काल में हो तो--भुवलोक जाता है ।
९,१०,११,१२ ये राशि स्वश्चक्र है--ये मरण काल में हों तो--स्वगं लोक
जाता है [जा० पारि०]।
६--व्यय भाव का ग्रह, या व्ययेश या व्यय भाव के नवांश से भी विचारना
कि मृतक कौन लोक को जायगा । ये ग्रह यदि--
सुर्य चंद्र हो-कैछास में । शुक्र हो-स्वगं में । मंगल हो-पुथ्वी में । बुध हो-वेकुण्ठ
में । शनि-यम स्थान में । गुरु-भ्रह्म लोक में । राहु-दूसरे द्वीपों में । केतु-नरक में
जायगा [फल दी०] ।
७--शीर्षोदय पृष्ठोदय राशि के अनुसार विचार--शीर्षोदय राशि हो तो--स्वगं
में जावे । पृष्ठोदय राशि हो तो--नरक में जावे [फल०] ! मृत्यु के पश्चात् स्वगं नरक प्राप्ति के योग
स्वगं प्राप्ति-१-वारहवें भाव में उच्च का शुभ ग्रह हो[शुभ ग्रहों से दृष्ट हो और
देव)लोकादि अच्छेअंशक में हो तो मृत्यु के बाद स्वगं प्राप्त हो । २-यदि दशमेश देवांश
में हो या १२ वें घर पर शुभ दृष्टि हो तो स्वगं प्राप्त हो [स० चि०| ३-अन्य मतदशमेश गुरु व्यय भाव में शुभ ग्रह से दृष्ट हो [स० चि०] । ४-व्ययेश उच्च में या
मित्र गृही या शुभ के वग में हो या शुभ ग्रह युक्त हो तो मृत्यु के पश्चात् स्वगं प्राप्त
हो [फल०] । ५-शुभ ग्रह उच्च राशि का १२ वें भाव में हो उसे पाप और शुभ ग्रह
देखते हों और शुभ वर्ग में भी हो तो मृत्यु के बाद स्वर्ग मिले [जा० पारि०]। ६-
गुरु दशमेश होकर १२ वें भाव में हो शुभ ग्रहों से युक्त दृष्ट हो तो मृत्यु के पश्चात्
ऊपरपद [देवपद] प्राप्त हो [जा० पारि०] । ७-वली गुरु कर्क लग्न में धनु के नवांश
में हो ओर ३-४ ग्रह केन्द्र में हों तो मत्यु के बाद ब्रह्मपद पाता है [जा० पारि०] 1
नरक प्राप्ति--१-बारहवें घर का स्वामी पाप षष्ठयंश में हो पाप ग्रह की दृष्टि
हो । २-राहु, गुलिक और अष्टमेश से युक्त होकर यदि १२ वें भाव में हो षष्ठेश से
दृष्ट हो तो मृत्यु के बाद नरक मिले [जा० पारि०]। ३-सूर्य मंगल के साथ राहु
१२ वें भाव में हो या द्वादशेश सूयं के साथ हो [वृ० पा०] । ४-व्ययेश पाप ग्रह के
अंश में, कूर अंश में या पाप ग्रह युक्त दृष्ट हो । ५-व्यय में राहु और मांदि अष्टमेश
युक्त हो या षष्ठेश से दृष्ट हो । ६-व्यय भाव राहु और केतु या अष्टमेश से युक्त या
षष्ठेश से दृष्ट हो तो मृत्यु पश्वात् नरक में जावे [स० चि०] ।