सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंमारक स्थान : २८७
जातक किस लोक से आया है १-खूयं चंद्र दोनों में जो बली हो वह जिस द्रेष्काण में पड़े उसका स्वामी यदि गुरु हो--देवलोक से आया है । यदि चंद्र शुक हो--पित् लोक से (चंद्र लोक से )। यदि सूर्ये मंगल हो--पशुलोक, मर्त्यं लोग या तिर्यक् लोक से । यदि शनि बुध हो--नरक से । यदि ग्रह उच्च के हों तो-पूवं बताये लोक में उच्च स्थिति रही । यदि ये ग्रह नोच के हों तो--पूर्व बताये लोक में नीच स्थिति रही । यदि ये ग्रह मध्य के हों तो--पूवं बताये लोक में साधारण स्थिति रही (वृ० पार०) ।
पूवं जन्म और भविष्य जन्म का हाल जानना पूर्व जन्म का -नवमेश से पूवं जन्म का हार प्रगट होता है। भविष्य का--पंचमेश से भविष्य का हाल प्रगट होता है। इन ग्रहों से जाति, देश, स्थान और दिशा आदि से पूर्व जन्म या भविष्य जन्म का विचार करना ।
उपरोक्त ग्रह उच्च का हो--वह देश देवताओं का होगा । उपरोक्त नीच या शत्रुगुही हो--विदेश । उपरोक्त स्वगृही, मित्र गृही या समगुही हो--वह देश भारत वर्ष होगा । ग्रह् के अनुसार देश विचार गुरु आर्यावर्त जो पूवं से पश्चिम समुद्र तक, उत्तर में हिमाळप, दक्षिण में विष्याचल ।
शुक्र, चंद्र--पवित्र नदियों के जल के समीप का देश । बुध--पुण्य स्थल ।
शनि--निद्य स्थान जो विदेशियों (म्लेच्छों) के कब्जे में हो । सूर्य--पहाड़ और जंगल देश ।
मंगल--विहांर देश (फल दी०) । गत जन्म में क्या था अगले जन्म में क्या होगा विचार पहिले वता चुके हैं कि नवमेश से पूवं जन्म का हाळ और पंचमेश से भविष्य जन्म का हाल जाना जा सकता है। उनसे यहाँ विचारमा कि क्या था और अब क्या होगा ।
वृक्ष लता आदि--पंचम और नवम के स्वामी स्थिर राशि या अंश में हों और पृष्ठोदय अधोमुख राशि भी हो तो वृक्ष लता आदि गत या भविष्य जन्म की योनि कहना ।
पशु जन्म--यदि ९ ओर ५ के स्वामी शोर्षोदय राशि में हों और ऊध्व॑मुख राशि में हो जिसमें चर राशि या अंश हो तो जन्म जानवरों के प्रकार का समझना ।