भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

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२८८ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड

मनुष्य जन्म-यदि ९ या ५ के स्वामी लर्नेश के उच्च या स्वक्षेत्री में हों 'तो

मनुष्य जन्म जानता ।

पशु योनि--यदि उपरोक्त राशि का ग्रह लग्नेश का सम हो तो पशु योनि का

जन्म समझना ।

पक्षी जन्म--यदि राशि शत्रुगृही या नीच में हो तो पक्षी का जन्म थाया

होगा । ९ या ५ भाव के स्वामी का द्रेष्काण विचार कर, द्रेष्काण के स्वरूप पर भी

विचार कर कहना (फल०) |

स्वस्थान में जन्म--यदि उपरोक्त दोनों ग्रह एक घर में हों तो अपने ही स्थान

में जन्म हुआ था या होगा ।

स्वजाति में जन्म--यदि वे बराबर बल के हों तो जन्म उसी जाति में हुआ था

या होगा ।

रंग गुण--रंग और गुण ९ या ५ भाव के स्वामियों के अनुसार विचारना संज्ञा

अध्याय में जो गुण घमं आदि कहा है उस पर पुर्ण विचार कर फल कहना (फल०) ।

पताकी अरिष्ट विचारा . मि० वृष मेष

३९ १७ १६

२० ६ १०

तुला वृश्चिक घन

यहाँ पताकी चक्र में राशि स्थिर हैं ओर यहाँ जो अंक दिये हैं वे अरिष्ट समय

सूचक हैं। इस चक्र में कुंडली के अनुसार जिस राशि पर जो ग्रह हो और जहाँ लग्न

हो लिख दिया जाता है। फिर दंडाधिपति ग्रह का निर्णय कर वैसा लिख दिया जाता

है | यदि छग्न से दंडाधिपति ग्रह का वेध हो तो पताकी अरिष्ट होता है और अरिष्ट

का समय जानने को वेध राशियों के योग से प्रकट होता है ।

वेध विचार--इस चक्र में सरल रेखा द्वारा ३ राशियों का सम्बन्ध

ओर उन्हीं ३ राशियों का वेध होता है । si