सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 299, कुल 454 में से
संदर्भ में पढ़ेंमारक स्थान: २८९.
यहाँ मेष और मिथुन राशि किसी वेध स्थान में नहीं है । इस कारण ककं का वेध
स्थान मिथुन नहीं होगा । परन्तु मिथुन का वेध स्थान कक होगा । इसी प्रकार सिंह
का वृष के साथ। कन्या का मेष के साथ । ओर तुला का मिथुन के साथ वेध नहीं
होगा । केवल नीचे बनाये चक्र के अनुसार ही राशियों का वेध होगा ।
राशि १ २ RM TIED (७. ८ 5 ९ RNS
बेघर HE YY UG VTS SP MR
राशियों ९ ५. ७ ९ दळ ७ ६. ५ (६० पः
१२ ११ १० १२ ११ १० १२११ ४ ९ ८ ७
मेष-वेध कन्या+धन+मीन योग इस प्रकार यहाँ मेष वृष मिथुन
२ १० ४ १६ १६ १७ २९
वृष-वेध वृश्चिक+सिहनकुंभ बताया है । शेष राशियों के चक्रानुसार अंक ही
६ ८ ३१७ रहेंगे अर्थात् ककं सिंह कन्या तुला
मिथुन-वेध कक+तुला+मकर ष्र ८ २ २०
५ २० १४ ३९ वृश्चिक धन मकर, कुम्भ और मीन ।
६ १० १४ ३ ४
पताकी वेध विचार के लिये पहिले यमाद्धं निकाल कर फिर दंडाधिपति निकालना
पड़ता है । जो ग्रह दंडाधिपति हो उस पर ऐसा लिख देना पड़ता है । फिर लग्न से
दंडाधिपति का वेध होता है या नहीं उपरोक्त चक्र से देखना पड़ता है । वेध होने से
पताकी अरिष्ट कहलाता है ओर वह अरिष्ट कब होगा, उनके वेध कारक राशियों. के
अंक या जोड़ करने से पता लग जाता है ।
यमाद्धं जानना
यमाद्धं रात और दिन का पृथक्-पृथक् होता है । दिन-रात में १६ यमाद्ं होते हैं
दिन में ८ और रात्रि में ८।
दिन का यमाद्धं जानने को जो दिन है उससे छटवां-छटवां आगे का ग्रह गिनते
जाने से ८ यमाद्धं निकल आते हैं जसे इतवार को यमाद्धं जानना है :--
(१) इतवार का पहिला यमाद्धे हुआ । जो दिन हो उसका पहिला यमाढ होता है
(२) इतवार से छटवां शुक्र, (३) शुक्र से छटवां बुध, (४) बुध से छटवां चन्द्र (५)
चंद्र से छटवां शनि, (६) शनि से छटवां गुरु,(७) गुरु से छटवां मङ्गल ओर (८) मंगल
से छटवां सूर्य का यमाद्धं होगा । दिनों के क्रम से यह गिनना चाहिये । इसी प्रकार
किसी भी दिन का यमाद्धं गिनकर निकाल ले
रात्रि का यमाद्धे पांक्ची होता हैं। १- जैसे शनि का पहिला यमाद्ध शनि ही
होगा २- द्रा शनि से पांचव्प-बुध, ३- बुध से पांचवां सूयं, ४- सूर्य से पांचवां गुरु
५- गुरु से पांचवां चंद्र, ६-चंदर से पांचवां शुक्र, ७-शुक्र से पांचवां मगळ, ८-मंगल से
पांचवां शनि, ये रात्रि के यमाद्े हुए ।
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