सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 315, कुल 454 में से
संदर्भ में पढ़ेंनीरोगता : ३०५
४--सप्तमेश या लग्नेश होकर चंद्र क्रूर ग्रहों से दृष्ट हो (जा०लं०) 1
५--शनि लग्नेश होकर कूर ग्रहों से दृष्टि योग द्वारा पीडित हो तो प्लींहा हो
और सुख हीन हो (जा० लं०) ।
६--लग्नेश होकर शनि लग्न में हो और पाप युक्त या दृष्ट द्रो तो सुख हीन हो
और प्लीहा रोग वाला हो (जा० छं०) ।
७--चंद्रमा शनि और मंगल के वीच हो और सूयं मकर का हो तो उसे प्लीहा,
गुल्म, विद्रधि या श्वास रोग हो (वृ० जा०)।
विद्रधि-१--छठे स्थान में गुरु होकर क्रूर दृष्ट, क्ररांशक गत होतो विद्रधि हो
(किसी अंग में गुमड़ा आदि रोग) (स० चि०)।
उदर रोग-१--चन्द्रमा या शुक्र ६ या ८ भाव में हो ।
२--जन्म स्थान में चंद्रमा अष्टम में शनि हो उसे पेट के रोग हों मंदाग्नि हो
तथा देह से हीन हो (छ० चं०) ।
३--सिह लग्न में चन्द्र पापयुक्त या दृष्ट हो तो पेट कां रोग हो।
४--मंगल पञ्चम में हो तो पेट का रोग हो (फल०) ।
५--तीसरे स्थान में क्रूर ग्रह हो या गुरु तीसरे स्थान में कूर ग्रह युक्त हो तो
मंदाग्नि रोग से पीडित रहे ।
६--चन्द्रमा पाप युक्त पापांशक में चतुर्थ भाव में हो तो पेट में पीडा और कफ
से फेफड़े में रोग हो (शंभु) ।
७--लग्न में षष्ठेश और लग्नेश वक्री ग्रह की राशि में हों इन पर शनि की
दृष्टि हो ।
शुक्र शनि से ८ या ६ भाव में पाप ग्रह हो तथा अष्टमेश ओर षष्ठेश सप्तम भाव
में हो तो पेट बढ़ने का रोग हो (शंभु) ।
८--छठे स्थान में शनि का कोई सम्बन्ध हो तो उदर विकार से कष्ट हो ।
९---शुक्र सहित चन्द्र छठे घर में हो तो मंदाग्नि रोग से युक्त,हीनांग (मान०) ।
१०--लग्न पाप ग्रह से युक्त हो या राहु से युक्त हो, शनि अष्टम हो तो कुक्षि
या पेट के रोग से पीडित हो (जो० पारि०)।
११--१, २, ८, १२ भाव में क्रूर ग्रह हों तो ८-१२ वर्ष में दस्त बंद होने से
पीड़ा हो (मान०) ।
१२--अष्टम घर में शनि,ळग्न में चन्द्र हो तो उदर रोग,मंदाग्नि या किसी अंण
से हीन हो (मान०) ।
अतिसार--१- शुक्र सातवे घर में हो तो मूलातिसार रोग हो (जा० पारि०) ।
२--लग्न में पाप राशि हो वहाँ शुक्र और चन्द्र हो तो अतिसार, सिर रोग
अपने व स्त्री के शरीर में कूमि रोग व अग्नि भय हो ।
पांडू रोग--१--चन्द्रमा मंगल के साथ षष्ठ भाव में हो तो वायु विकार से पांडु
रोग हो (जॉ० पारि०) ।
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