भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

पृष्ठ 316, कुल 454 में से

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पृष्ठ 316

३०६ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड

पीनस--१--व्यय भाव में पाप ग्रह हो, चंद्र छठे शनि आठवें भाव में हो लग्नेश पाप ग्रह के नवांश में होःतो पीनस रोग हो (जा० पारि०) । २--शनि मंगळ सूर्य ये अशुभ स्थान में एकत्र हों तो नासिका रोग हो अनेक ज्याधि व शत्रु भय हो ।

आमवात--१--क्रूर लग्न में जन्म हो और लग्नेश कूर ग्रहों से युक्‍त हो तो आमवात रोग से कष्ट हो (ल० चं०) । नाभि में रोग-षष्ठेश तृतीय में हो तो नाभि में दृढ़ रोग से दुःख हो सम्पूर्ण गाँव 'को दुःख देवे (जा० ल॑०) । | माता (चेचक)--१--मंगल लग्न में हो उसे शनि व सूर्य देखते हों तो शीतला हो (जा० पारि०) । ई श्वेत कुष्ठ--१--शुक्र शनि दोनों मंगल की राशि में हों चंद्र व्यय में हो, मंगल तीसरे भाव में हो तो एवेत कुष्ठ हो ।

२--षष्ठ में मीन या मेष के नवांश में स्थित चंद्र पाप ग्रहों से दृष्ट हो तो श्वेत कुष्ठादि हो (जा० सं०) ।

३--युरु शनि दोनों अष्टम में हों चन्द्रमा षष्ठ में हो, बुध शुक्र नवप में हों तो चित्र देह हो (जा० सं०) । ; ४--चन्द्र लग्न में, सूर्य सप्तम, और शनि मंगल दूसरे या बारहवें हों तो श्वेत कुष्ठ हो (वृ० जा०) ।

५- लग्नेश अष्टम भाव में पाप युक्त या दृष्ट हो तो श्वेत कुष्ट, मंदारिनि, दाद खुजली आदि हो (शंभु ०) । ६--छग्नेश और बुध ये दोनों या मंगल और चन्द्र ये दोनों राहु या केतु से युक्त होकर कहीं हों तो श्वेत कुष्ठ साजन आदि रोग हो (जा० छ॑०) । ७--चन्द्रमा मेष या वृष राशि में मंगळ, शनि युक्त हो तो श्वेत कुष्ठ व रोगी हो (जा० लं०) ।

८-नीच में व चर राशि में शुक्र में चन्द्र का योग पाप युक्त हो तो पांडु कुष्ट हो (शंभु) ।

रक्त कुष्ट--१--सुर्य कहीं भी मंगल या शनि युक्त हो तो रक्त कुष्ठ, कृष्ण कुष्ठ (देह में लाल या काले चिट्ठे पड़े) हो ( जा० लं० )। २--शुक्र गुरु चंद्र या शनि ये चारों मीन या ककं या वृश्चिक राशि में हों तो रक्त कुष्ठ हो शरीर सुड रहित हो ( जा० ०) ' - ३--शनि के साथ चंद्र षष्ठ भाव में हो तो ४५ वर्ष में रक्त कुष्ठ हो (वृ० पा०)। कुष्ठ--१-नवम पंचम भाव में २,४,१०,८, राशि हो और पाप ग्रह युक्त या ` दृष्ट हो तो कुष्ठ हो ( जा० सं० ) |

२- चन्द्र, बुध ओर लग्नेश मङ्गल के साथ तीनों ग्रह हों तो कोढ़ हो ।

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