सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 325, कुल 454 में से
संदर्भ में पढ़ेंनीरोगता : ३१%.
१०-सप्तम में गुर के साथ राहु हो तो नपुंसक हो । ११-शुक्र से ६ या ८ स्थान में शनि हो तो नपुंसक नहीं होता किन्तु नपुंसक के समान होता है ।
अन्यमत--शुक्र से ६ या १२ स्थान में शनि हो तो उपरोक्त फल हो। इन्द्रिय सुख--यदि अष्टम भाव शुभ ग्रह युत या दृष्ट हो तो भोग इन्द्रिय के लिए बड़ा सुख होगा ।
विचार--फल कहते समय उस वात के कारक का भी विचार करना चाहिए । मान लो अष्टम में बुध और गुरु ये दो शुभ ग्रह हैं तो भोग इन्द्रिय स्वस्थ होगी परन्तु मान लो शुक्र मंगल और शनि सप्तम में है या चतुथं में है तो भोग इन्द्रिय रोगी होगी और उसका आचरण भी खराव होगा । गुप्त रोग--१-षष्ठेश वृश्चिक या ककं के नवांश में हो मंगल से दुष्ट हो तो भंग गुप्त रोग से पीड़ित रहे ( जा० सं० )1
२-चन्द्र वृश्चिक या ककं नवांश में पाप युक्त हो तो गुप्त रोग हो (वृ० जा०) । ३-गुरु छर्न से व्यय स्थान में हो तो ऐसा रोग हो जिसे वैद्य भी न जान सके ( जा० छं० ) ।
प्रगट रोग--१-शुक्र मंगल सप्तम हो उस पर पाप ग्रह की दृष्टि हो तो शरीर में बाहर से रोग प्रगट रहेगा ( वृ० जा० ) । अंड वृद्धि-१-अष्टम में मंगल युक्त शुक्र हो तो वायु विकार से अंडकोष की वृद्धि हो ।
२-मंगल की राशि में स्थित शुक्र व चन्द्र ये दोनों गुरु से दृष्ट हों तो वीयं व रक्त इन दोनों के मिश्रित विकार से अतिशय अंडकोष की वृद्धि हो ( जा० छं० ) | ३-राहु लनन में, गुलिक त्रिकोण में, मंगल ओर मांदि केन्द्र में हों तो बड़े अंडकोष हों ।
४-अष्टमेश का नवांश स्वामी राहु के साथ हो तो अंडवृद्धि हो ( स० चिं० ) । ४-तृतीय स्थान में शनि मंगल राहु हो पष्ठेश से दृष्ट हो ( जा० पारि० ) ।
६-छग्न में राहु मंगल या शनि के सांथ हो ( जा० पारि» )। ७-छग्नेश राहुं या गुलिक के साथ अष्टम में हो तो बड़े अंडकोष हों (जा पारि.)। ८-लग्नेश राहु या दुसरे पाप ग्रह युक्त अष्टम में हों तो अंड वृद्धि हो । यदि ग्रह बलवान् हो तो बुरा रोग हो, अशक्त हो तो साधारण रोग हो । अष्टम भाव गुप्तांग सूचक है ।
९-लग्नेश के नवांश स्वामी के साथ राहु आदि और मंगल हो तो अंड वृद्धि हो ।
यदि तीनों ग्रह साथ हों तो उपरोक्त फल होगा यदि उनमें एक ही ग्रह हो तो
कम फल होगा । १०-मंगळ राहु या राहु शनि के योग से अंड वृद्धि हो ( जा० पारि० ) | वृषण रोग--१-मीन लग्न में सूर्य हो मंगल से दृष्ट हो । या शुक्र घुक्त वृश्चिक