भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

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३१४ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड

सप्तम या दशम मंगल शुक्र से युक्त या दृष्ट हो तो प्रमेह रोग हो (शंभु०) । (२) अष्टमेश अपने नवांश में होकर राहु के साथ अष्टम भाव से त्रिकोण में हो तो १८ या २२ वर्ष में प्रमेह आदि रोग या गठिया रोग हो (वृ० पा०) वीर्य विकार--लग्न में गुरु, सप्तम मंगल हो तो वीर्य विकार हो (जा० भ०) ।

उपदंश--(१) षष्ठ स्थान में शुक्र हो तो उपदंश रोग हो । (ज्यो० शा० ) 1 (२) चंद्र बुध और लग्नेश सूर्य युक्त राहु के साथ हो तो उपदंश हो यदि उप- रोक्त तीनों ग्रह सूयं के नवांश में हों दो भी वही फल हो (स० चि० )1 इन्द्रिय रोग--अष्टम में कई पाप ग्रह हों तो गुप्तांग में कई विकार हों (स०्चि०) (२) षष्ठेश बुध युक्त लग्न में हो तो शिश्न में रोग हो (स० चि०)। (३) चन्द्र ४८ या ११ राशि के नवांश में शनि युक्त हो तो भोग इन्द्रिय में रोग हो (स० चि०)।

४-छठे भाव में मंगल लग्नेश युक्त हो तो घाव से शिशन में रोग हो (जा. पारि.) । ५-शुक्र ७ या ८ घर में हो तो गुप्तांग में रोग हो ( फल० ) । ६~षष्ठेश शनि युक्त लय में हो तो किसी कठिन रोग से गुप्तेन्द्रिय में चीरफाड़ हो । शिशन कटे--१-षष्ठेश शनि युक्त लग्न में हो ओर शुभ ग्रह की दृष्टि न हो तो शिश्न काटा जावे ( स० चि० ) | २-ष्ठेश बुध युक्त तया राहु युक्त लग्न में हो तो आप ही अपना लिंग कटा देवें ( स० चि० ) ।

३-यदि षष्ठेश मंगल सहित हो उस पर शुभ दृष्टि न हो तो किसी रोग से लिंग छेदन हो अर्थात्‌ काटा जावे या लिग का रोग हो ( स० चि० ) । ४-सू्यं युक्त राशि लग्न में हो उस पर शुक्र या चन्द्र की दृष्टि हो और ' सूर्य ग्रहण लगता हो तो लिंग काटा जावे और वह अपयशी हो ( जा० ल॑० ) | नपुंसक--१-दशम में या अष्टम में शनि युक्त शुक्र हो शुभ दृष्टि रहित हो या शनि ६, १२ भाव में नीच का हो तो नपुंसक हो । २-विषम राशि में स्थित सूर्य, सम राशि में स्थित चंद्र हो परस्पर एक दूसरे पर दृष्टि हो।

३-विषम राशि में शनि, सम राशि में बुध हो, परस्पर दृष्टि हो । ४-विषम राशि में मंगल, सम राशि में सूर्य हो परस्पर दृष्टि हो । ५-विषम राशि में लग्न व चन्द्र दोनों हों ओर सम राशि में स्थित मंगल से दुष्ट हो।

६-विषम राशि में स्थित चन्द्र व बुध ये दोनों विषम राशि स्थित मंगल से दृष्ट हों ।

५-लग्न, शुक्र व चन्द्र ये तीनों पुरुष ग्रह राशि व नवांश में हों तो नपुंसक हो । “पाप ग्रह सप्तम स्थान में हों उन पर शुभ दृष्टि न हो तो नपुंसक हो । १-षष्ठेश ओर बुध राहु के साथ लग्नेश के सम्बन्धी हों तो नपुंसक हो ।