भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

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३२६ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड

२१--नवम में चन्द्र और सूर्य हो तो नेत्र रोगी हो ओर धनी हो (जा० पारि०) ।

२२--पाप ग्रह युक्त चन्द्र लग्न में हो तो नेत्र की हानि हो (जा० भ०)।

२३--होदश भाव शुभ ग्रह युक्त हो, द्वादशेश केन्द्र या त्रिकोण में हो इसमें यदि

पाप ग्रह का योग हो तो नेत्र का विकार हो, द्रव्य की हानि, कृपण, कजंदार, पर स्त्री

से व्यसन, देश-देश फिरे (प्रा० यो०) ।

२४--मेष लग्न भें सूर्य हो तो नेत्र में रोग हो (जा० पारि०) या नेत्र में फुली

या लाल नेत्र वाला हो (ज्यो० शा०) ।

२५--ककं लग्न में सूर्य हो तो नेत्र में फुली, हो या छोटी आँख वाला हो

(ज्यो० शा०) ।

२६--दितीय भाव में चन्द्र हो जिस पर शनि की दृष्टि हो तो दोष पूर्ण नेत्र हो,

आँख में फुली हो (ज्यो० रह०) ।

२७--द्वितीय भाव या द्वितीयेश मंगल, शनि या गुलिक से युक्त हो तो नेत्र रोग

हो (स० चि०) ।

२८--द्वितीयेश की राशि का नवांश स्वामी पाप ग्रह युक्त हो चतुर्थ भाव में

दूसरा पाप ग्रह हो तो नेत्र रोग हो (स० चि०)।

२९--द्वितीयेश सूर्य मंगल या केतु के साथ हो और शनि व गुलिक की दृष्टि हो

तो उष्णता से बहुत नेत्र पीड़ा हो या पीलिया या और कोई शारीरिक रोग हो

(स० चि०) 1

नेत्र रोग ३०--द्वितीय भाव या द्वितीयेश पाप युक्त या पाप दुष्ट हो, सूर्य निर्वेल

हो पाप योग दृष्टि हो तो पाप ग्रहों के बळानुसार नेत्र पीड़ा हो। शुभ ग्रह वली हो

तो अच्छाई करेंगे (स० चिं०) ।

३५--छग्नेश व अष्टमेश षष्ठ में हो तो दाहिने नेत्र में रोग हो । अकेला शुक्र

छग्नेश होकर ६ या ८ भाव में हो तो दाहिने नेत्र में रोग हो (जा० ल॑०) ।

३२--लग्न व अष्टम स्थान में शुक्र हो क्रूर ग्रहों से दृष्ट हो आँसू गिरने के

कारण नेत्र में पीड़ा हो (जा० ल॑०) 1

३३--'क्त्र ग्रह से युक्त या दृष्ट सूयं लग्न से ५, ९ या १२ भाव में हो तो नेत्रों

से विकल हो (जा० ०) ।

३४--सूर्य या चन्द्र व्यय भाव में हो शनि ५ या ९ भाव में सूर्य राशि या नवांश

मों नीच का हो या शत्रु अंश में हो और सप्तम या अष्टम घर में हो तो नेत्र पीड़ा

और दाँत का ददं हो (सवं चि०) ।

३५--व्यय या धन भाव चन्द्र और सूर्य से युक्त या दृष्ट हो तो नेत्र रोग हो

(फल०) ।

३६--सूर्य चन्द्र बुध शनि वारहवें घर में या मीन राशि में हों और मध्य स्थानः

में मंगळ हो तो हीन दृष्टि हो (मान०) ।

३७--सिंह लग्न में सूर्यं मंगल हो उस पर शुभ ओर अशुभ दोनों ग्रहों की दृष्टि