भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

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नीरोगता : ३३७

भय विचार अरिष्ट

भय विचार--अष्टम घर भय का द्योतक है और लग्न शारीरिक बनावट का

आधार है, षष्ठ घर कर्जे, रोग ओर शत्रु का है । इस कारण सब भय इन घरों से

और इनके स्वामियों से प्रगट होते हें ।

अनेक भय--लग्न में क्रूर ग्रह को लग्नेश बल रहित होकर उसके पीछे कहीं हो

तो अनेक भयों से युक्‍त हो । देह या मन की व्यथा से युक्त हो (जा० ल॑०) ।'

विष भय १--यदि दूसरा भाव पाप ग्रह युक्‍त या दृष्ट हो या दूसरा भाव क्रांश

में हो या उसका स्वामी पाप युक्त यां पाप दुष्ट हो तो विषली औषधियों से धोखा

दिया जायगा (स० चि०) ।

२--तीसरे भाव में कोई ग्रह नीच, शत्रु गृही, अस्तंगत, पाप दृष्ट हो तो विष

प्रयोग से या विष भक्षण से विष का प्रभाव हो इसके अभाव में धन का नाश हो

(जा० पारि०) ।

३-राहु से युक्त लग्नेश हो तो निश्चय ठगेदी से विष का भय हो (जा० पारि०)

सर्प भय १--राहु सपं बताता है । "जस राशि में राहु है उसके स्वामी के सहित

तृतीयेश लग्न में राहु युक्त हो तो सर्प भय हो (स० नि०)।

२--ढितीयेग जहाँ हो उसका स्वामी लग्न में राहु युक्त हो तो सर्प का भय हो

(स० चिं० ) ।

३--तृतीय स्थान में राहु गुलिक से युक्त या दृष्ट हो तो सपं का भय हो

(स० चिं० )। ।

४--तीसरे भाव में शुक्र हो राहु से दृष्ट हो उसमें यदि शनि की भी दृष्टि हो

तो सहोदर भगिनी दुविष से मरे और सपं का भी भय हो ( जा० सं० ) । /

५--तीसरे भाव में शक्र हो शनि से दृष्ट हो तो सर्प भय हो ( शंभु० ) 1

इन योगों में बलवान्‌ शुभ ग्रह युक्त या दृष्ट हो तो काटने से अच्छा हो जायगा ।

६--अष्टम में चन्द्र और मंगल शत्रु गृही हो तो सर्प भय ।

७--लग्नेश षष्ठेश राहु या केतु युक्त हो तो सर्प को पीड़ा, चोटादि भय हो

( जा० पारि० ) ।

शवान भय १--धन स्थान में पाप युक्त या पाप दृष्ट शनि हो कुत्ता काटने का

भय हो ( स० चिं० ) ||

२--द्वितीयेश शनि युक्त या दृष्ट हो तो कुत्ता काटने का भय हो ( स० चिं० )॥

३--शनि मंगल युक्त हो तो कुत्ते से भय हो ( स० चिं० ) 1

४--षष्ठेश मंगल युक्त हो तो कुत्ते से भय ( स० चिं० ) ।

५--लाभ में शनि, राहु, बुध हो तो कुत्ते के काटने की व्यथा हो ( शंभु० ) ।

६- लग्नेश और षष्ठेश दोनों ६ भाव में हों तो १० और १९ वर्ष में कुत्ते का

भय हो ( वू० पा० ) ।

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