सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
पृष्ठ 346, कुल 454 में से
संदर्भ में पढ़ें३३६ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड
वामन १--चन्द्रमा राशि के पहिले या पिछले नवांश में हो शनि चतुर्थ दृष्टि से
देखे, शुभ ग्रहों की दृष्टि न हो और लग्नेश अल्पराशि में हो तो उसका वामन (छोटा)
शरीर हो (शंभु०) ।
२--पृष्टोदय राशियों में स्थित चन्द्र को लग्न से चतुर्थ में स्थित शनि देखता हो
और लग्नेश मेष राशि में हो तो शरीर वामन हो (पृष्टोदय राशि-मेष वृष कक, धनु,
मकर) (जा० लं०) ।
३--मकर का अन्त्य का (९ रा-२७-० से ३०-०) लग्न हो उसे शनि चन्द्र और
सूर्य देखते हों तो वामन हो (जा० पारि०) ।
ऊँचा शरीर १--मंगल बुध ये दोनों परस्पर सातवीं दृष्टि से देखते हों अर्थात्
मंगल को बुध, बुध को मंगल सप्तम दृष्टि से देखता हो तों लम्बी देह वाला हो
(जा० लं०) ।
पतला शरीर १--क्रूर ग्रह केन्द्र में हो तो विकट अर्थात् पतले शरीर का हो ।
२--एक ही राशि में सूरय केन्द्र में हों तो पतले शरीर का हो ।
३--लग्न में शक्र हो, शनि से दृष्ट हो तो कटि के नीचे का भाग पतला हो ।
४--चतुर्थ में शुक्र हो ओर गुरु युक्त होकर शनि या मंगल या बुध कहीं होतो
कटि के नीचे का अंश व बाहु व पेर पतले हों (जा० ल॑०) ।
दुबला १--सूर्य चन्द्रमा एक दूसरे के घर या नवांश में हों तो शरीर में दुबलापन
हो (स० चि०) ।
२- जन्म राशि का स्वामी, लग्नेश के साथ लग्न से त्रिक स्थान में हो तो दुर्वछ हो (जा० ल०) ।
३-दूसरे में सूर्यं शनि हो, दशम चन्द्र, सप्तम मंगल हो तो वह हीन देह का
हो (जा० म०) ।
४--मेष का चन्द्र शनि युक्त हो बारहवां सूर्य हो लग्न में वक्री ग्रह न हो, मंगल
केन्द्र में न हो तो शरीर कृश हो (शंभु०) ।
५--छग्नेश गुरु हो और अष्टम में शनि हो तो बहुत दुबला पतला हो जीवन
कष्ट में बीते ।
६--शनि राशि स्थान में हो तो दुबला हो ।
३ह में दुर्गन्ध १--शुक्र शनि की राशि में हो तो देह से दुर्गन्ध आवे । २--पषष्ठेश मिथुन कन्या या मकर राशि में हो तो देह में दुर्गन्ध हो । ३- केन्द्र में बुध युक्त शुक्र मिथुन या कन्या राशि में हो । ४-शुक्र व शनि दोनों अपने त्रिशांश में हों या हृद्दा में हों तो देह से दुर्गन्ध आवे ४<-मेष लग्न में चन्द्र हो तो मुख से दुर्गन्ध आवे । ग्रहों की दीप्तादि अवस्था का भी विचार कर फल कहना (जा० लं०) । ६--शुक्र पाप राशि पाप हृद्दा में या चन्द्र क्षेत्र में हो चन्द्रमा मेष का षष्ठेश बुध लग्न में हो तो उसके मुख से दुर्गेन्ध आवे । (शंभु०) ।