भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

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नीरोगता : ३३५

हस्तहीन--यही योग पंचम में हो तो हस्तहीन हो (जा० पारि०) ।

सिर कटे १--क्रूर षष्ठ्यंश में शनि लग्न में हो सप्तम भाव राहु से युक्त हो

दशम में शुक्र हो ऐसा योग हो तो सिर कटे ।

१--क्षीण चन्द्र हो, राहु से दृष्ट शनि हो तो सिर कटे (स० चि०) ।

३--राहु शनि की राशि में हो और चन्द्रमा सूर्य की राशि में हो तो फरसा से

सिर का घात हो (जा० स०)।

४ राहु ककं राशि पर चन्द्रमा सिंह राशि पर हो तो सिर कटे (जार सं०) ।

५-अष्टम में सूर्यं चंद्र दोनों हों तो सिर कटे या अपने अङ्ग को काटने वाला हो (जा० सं०)।

पेट फटे--कृष्ण पक्ष का चंद्र राहु बुध से युक्त हो सूयं से भी अस्त हो (स०चि०) कुक्षि छेदन--शनि लग्न में, शुभ दृष्टि रहित, राहु सूर्य से युक्त क्षीण चन्द्रमा होवे तो कुक्षिं फटे (स० चिं०) ।

जंघा कृश १--दशम में पाप ग्रह हो तो जंघा या घुटना कृश अर्थात्‌ कमजोर हों (स० चिं) ।

अँगुली जुड़ी १--लग्न में पाप युवत चन्द्र हो तो पैर की भेंगुलियां वाम पद का कोई भाग जुड़ा हो या बाँये हाथ मे ऐसा हो (शंभु०) ।

अंग विकल १--सूयं से दूसरे स्थान में शनि, दशम में चन्द्र सप्तम मंगल हो तो अंग विकल हो (स० चिं०) ।

२--दशम में चन्द्रमा, सप्तम में बुध, दूसरे में शनि हो तो शरीर विकलांग (अंग

कला रहित) हो (स० चिं०) ।

३--केतु या राहु लग्न में हो छग्नेश दुष्ट स्थान में हो तो उसकी दशा में जब उसके ६ स्थान के स्वामी की अन्तदंशा हो तो अंग में विकलता हो (जा० पारि०) 1

४--पाप ग्रह शुभ ग्रह के नवांश में होकर षष्ठ भाव में हो और पाप ग्रह से

दृष्ट हो तो उसकी मृत्यु हो या उसे विकल शरीर वाला करे (जा० सं०) ।

५--व्ययेश बली होकर क्र या नीच अंश में हो तो शरीर में विकलता या

कुरूपता हो (स० चिं०) ।

६---व्यय में बहुत पाप ग्रह होवें, व्ययेश शनि, राहु या माँदि से युक्‍त हो तो

शरीर में विकलता हो (स० चिं०)

७--गुरु शनि के साथ हो, अद्ध चंद्र दशम में हों, सप्तम में मंगल हो तो विकल

हो (जा० पारि०) ।

८--केन्द्र में क्रूर ग्रह या सूर्य चन्द्र हों ।

कुव्ज १--चन्द्रमा पहिले या पिछले नवांश में तीसरे भाव में हो, शनि चोथा हो,

रूम्तेश शत्रु गृही हो, मंगल क्षीण चन्द्रमा के साथ हो तो कुब्ज (कुबड़ा) हो (शंभु०) ।

२--चन्द्रमा अपनी राशि का होकर लग्न में हो उस पर शनि ओर मंगल की

दृष्टि हो तो कुबड़ा हो (जा० पारि०) 1