भारतकोश
सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २

Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2

बाबूलाल ठाकुर द्वारा

स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)

DevanagariHindipublished454 पृष्ठ

पृष्ठ 344, कुल 454 में से

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पृष्ठ 344

३३४ : सचित्र ज्योतिष शिक्षा, तृतीय फलित खण्ड

नोच, शत्रु गृही, कूर अंश या करूर वर्ग में हो बांये पैर में रोग हो । इसी प्रकार धन

भाव में हो तो बांये पैर में रोग हो ।

हाथ कटे १--शनि गुरु सहित नवम या तृतीय स्थान में हो, सूर्य अष्टम या द्वादश

स्थान में हो तो हांथ कटे ।

२--चन्द्र ७ या ८ घर में हो मंगल या गुरु से युक्त हो ।

३--नवम में शनि, तीसरे में गुरु हो ।

४--शनि अष्टम और गुरु द्वादश में हो ।

५-दशम भाव में राहु शनि और बुध हो ।

६--षष्ठेण जब शुक्र और सूर्य युक्त हो या शनि राहु युक्त कूर षष्ठ्यंश में हो

(स० चि०)।

७- शनि सूर्य की राशि में और मंगल गुरु की राशि में हो शुभ ग्रह से युक्त न

हो तो भुजदंड का छेदन हो (जा० स०)।

शनि, मंगल या सूय की राशि में पाप युक्त हो तो भुजदण्ड का खण्ड हो

जा० सं०) ।

र हस्त पीड़ा १--छग्न से ६ या ८ घर में सूयं चन्द्र शनि तीनों हों तो हाथ में

पीड़ा हो (जा० लं०) ।

लूला--छठ स्थान में सूर्य मंगल शनि हो ।

कुनखी हाथ पर चोट--तीसरे घर में राहु शनि युक्‍त हो तो कुनखी हो या

दाहिने हाथ पर लकड़ी की चोट या वायु से पीड़ा हो (शंभु०) 1

हाथ पैर कटे १--कृष्ण पक्ष का चन्द्रमा सप्तम में हो तो हाथ कटाये (स०चि)।

२--शनि युक्‍त शुक्र छठे भाव में हो और शत्रु ग्रह की दृष्टि हो तो एक भुजा

और एक पाँव का खण्डन हो (जा सं०) ।

३--बुध मंगल बलवान्‌ हो छठे भाव में हो तो वह चोर हो और इस काम में

उसके हाथ पर काटे जावें (शंभु) ।

४--कर्के में शनि, मकर में मंगल हो वह चोरी के प्रसंग में दण्ड से हाथ पैर

काटे जावें (शंभु०) ।

५--राहु सूर्य मंगल चन्द्र अष्टम में हो तो सब हाथ पाँव से खंडित हो (जा०सं०)

६-छग्न या छठे घर में बुध और मंगल हो तो चोर हो, हाथ पैर नष्ट हो

(मान०) ।

हाथ पैर दुगुने--बुध लग्न से त्रिकोण में हो और सब ग्रह जहाँ कहीं निबेल हो

सो २ मुंह ४ पेर ४ हाथ वाला हो (जा० पारि०) |

बिना हाथ पेर सिर १--पंचम नवम और लग्न का द्रेष्काण पाप ग्रह युक्त हो तो

जातक क्रम से बिना हाथ, पैर, सिर का होवे (जा? पारि०) ।

बिना सिर--छच्न के द्रेष्काण में मंगळ हो, शनि सूर्य और चन्द्र उसे देखते हों सी बिना सिंर वाला हो (जा० पारि०)।

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