सचित्र ज्योतिष शिक्षा भाग २
Sachitra Jyotisha Shiksha Vol 2
बाबूलाल ठाकुर द्वारा
स्रोत: Motilal Banarsidass Edition · Motilal Banarsidass, Delhi (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें_ नीरोगता : ३४१
| ८--छग्न में पाप ग्रह गुलिक त्रिकोण में हो या लग्न व लग्नेश गुलिक युक्त हो
तो ठग और चोरों से भय हो (स चिं)।
चोर दुःख--लग्नेश, बुध, गुरु, शुक्र व चन्द्र यदि नीच के, अस्तंगत, पराजित,
पापाक्रांत, वक्री, अनुवक्री, आगे वक्री होने वाला हो और त्रिक में हो तो चोर दुःख,
पीड़ा, दरिद्र, रोग, भ्रमण, शत्र भय, वस्त्रहीन आदि अपनी दशा में करें । चोर और प्रेत भय १--लग्न में बुध केतु हो पाप दृष्टि हो तो चोर और प्रेत
आत्माओं से भय हो (स० चिं०) ।
पिशाच पीड़ा १--राहु और शनि यें पिशाच के सूचक हैं जिस पर पिशाच हो
वह उदास बलहीन, भयानक स्वप्न से पीडित, लगातार मानसिक भय, उत्तेजना,
अजीर्ण कभी-कभी दस्त और चक्कर आते हैं।
२-ण्लग्त में शनि राहु हो तो पिशाच की पीड़ा हो (स० चि०) ।
३--द्वितीय में शमि व राहु हो तो भूत पिशाच आदि कृत रोग हो (जा०स०) । ४--पष७ठ में राहु केतु पाप दृष्ट होकर क्रूर नवांश में हो तो पिशाच पीड़ा हो (स० चिं०) ।
५--चन्द्र लगन में हो और राहु ग्रस्त हो (ग्रहण का समथ हो) और त्रिकोण में
पाप ग्रह शनि मंगल हो तो उस पर पिशाच की वाधा लगी रहे (वृ० जा०) ।
६--अष्टम में निवळ चन्द्र, शनि सहित होवे तो पिशाच और जल से उत्पन्न
पीड़ा हो ।
७--क्षोण चन्द्र अष्टम में मंगल, राहु य! शनि में से किसी से युक्त हो तो भी
उपरोक्त फल हो (स० चि०) ।
८--उपरोक्त प्रकार से क्षीण चन्द्र दुष्ट स्थान में हो तो पिशाच की पीड़ा हो
और मृत्यु हो ( स० चि० ) ।
अर्थात् क्षीण चन्द्र मंगल राहु या शनि युक्त होकर ६-८*१२स्थान में हो तो
पिशाच पीडा या पागलपन से मृत्यु हो ।
९--क्षीण चन्द्र अष्टम में राहु युक्त हो और दूसरा भाव पाप युक्त हो तो
पिशाच पीड़ा से मरे ( स० चि० ) 1